उत्तराखंड : उत्तराखंड से जुड़ी एक बड़ी किसाऊ बांध परियोजना के कार्य में अब तेजी आने की उम्मीद है। सोमवार को किसाऊ बांध परियोजना को लेकर गृह मंत्री अमित शाह बैठक करेंगे। इस बैठक में मुख्य सचिव सहित राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी शिरकत करेंगे।

गृह मंत्रालय विगत तकरीबन करीब छह महीने से स्वयं इसकी निगरानी कर रहा है। सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह सभी हितधारक राज्यों के अफसरों के साथ दिल्ली में बैठक करेंगे। इसके उपरांत 16 जून को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है।

किसाऊ बांध परियोजना की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। बता दें कि 1940 के दशक में इस परियोजना का बीजारोपण हुआ था। तत्पश्चात वर्ष 1996 में इसकी एक डीपीआर तैयार की गई लेकिन पर्यावरण संबंधी आपत्तियों और अन्य कारणों से यह आगे नहीं बढ़ पाई। वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया था। इसे बाद फिर से नई डीपीआर बनाने का फैसला हुआ लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया।

वर्ष 2021 में संशोधित डीपीआर बनाने का फैसला किया गया। यह डीपीआर अब बन चुकी है, जिससे परियोजना लगभग 15 हजार करोड़ रुपए में तैयार हो जाएगी। गृह मंत्रालय इस परियोजना को जल्द निर्माण के चरण में लाना चाहता है। डीपीआर एप्रूवल के लिए केंद्र को भेजी गई है, जिस पर पर्यावरणीय व अन्य संबंधित स्वीकृतियां ली जानी हैं।

गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को इस परियोजना की समीक्षा करेंगे, जिसमें हितधारक राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, और हिमाचल के कई बड़े अधिकारी सम्मिलित होंगे। इस बैठक में उत्तराखंड से मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन, यूजेवीएनएल के एमडी अनिल कुमार सिंह समेत कई अधिकारी शामिल होंगे। अफसरों के साथ बैठक के पश्चात गृह मंत्री शाह 16 जून को उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ इस पर बैठक करेंगे।

टिहरी के बाद एशिया की दूसरी सबसे बड़ी इस परियोजना से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के 17 गांव जलमग्न हो जाएंगे, जिससे तकरीबन एक हज़ार परिवारों का विस्थापन करना होगा। बहुउद्देशीय किसाऊ जलविद्युत परियोजना पूर्ण होने के पश्चात 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

इसमें से उत्तराखंड को 350 मेगावाट बिजली मिलने के साथ ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी उपलब्ध हो पाएगा। इससे यमुना नदी में चली आ रही पानी की किल्लत भी दूर हो जाएगी।

किसाऊ बांध परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन हिमाचल प्रदेश की है। हिमाचल एक ऊर्जा सरप्लस राज्य है। हिमाचल का ही सबसे अधिक हिस्सा इस परियोजना से जलमग्न होना है। लिहाजा, हिमाचल इस परियोजना में ज्यादा गंभीरता नहीं दिखा रहा है। गृह मंत्रालय के कमान अपने हाथ में लेने के उपरांत सभी छह हितधारक राज्यों के बीच सहमति बन जाने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक व अन्य पर्यटक स्थलों का विकास कर पर्यटन प्रदेश को और अधिक विकसित करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। सीएम ने कहा कि इससे न केवल यहां पर्यटन का भविष्य बेहतर होगा बल्कि साथ ही पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे। सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड हिंदुस्तान का श्रेष्ठ प्रदेश बने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश में प्रदेश इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

सीएम ने कहा कि नैनीताल के कैंची धाम में यातायात व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। वर्तमान में भवाली बाईपास शुरू हो चुका है और कैंची बाईपास भी लगभग तैयार हो गया है जिसे शीघ्र ही सुचारु कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैंची धाम के साथ ही चार धाम सहित केदारखंड, मानसखंड, आदि कैलाश को सुविधा संपन्न बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हिमालयी राज्य होने के कारण पर्यावरण संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है तथा हमारा लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है।

सीएम ने नैनीताल स्थित राज्य अतिथि गृह सभागार में कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी की। धामी ने उत्तराखंड को समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य बताया। उन्होंने प्रदेश में सड़कों के जाल, मानसखंड मंदिर माला मिशन और धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण की बात की। मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने और 2027 की तैयारी में जी जान से जुट जाने का आह्वान किया।

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