उत्तर प्रदेश : मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने से आंधी-बारिश का दायरा सिमटने और गर्मी बढ़ने की संभावना बन रही है। अगले एक सप्ताह में तापमान में  छह डिग्री तक की बढ़ोतरी ही सकती है। हालांकि, मानसून पूर्वी क्षेत्रों में प्रगति पर है, परंतु अल नीनो के सक्रिय होने से वर्षा के सामान्य से कम रहने की स्थिति पैदा हो सकती है।

पिछले दिनों सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्रदेश में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला लेकिन अब इसका असर कमजोर पड़ने लगा है। ऐसे में प्रदेश में आंधी-बारिश का दायरा सिमट जाएगा जिससे गर्मी एक बार फिर अपना प्रभाव दिखाएगी। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी प्रदेश में मौसम शुष्क रहने के आसार बन रहे हैं। शनिवार से धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोतरी होगी और अगले हफ्ते में छह डिग्री तक तापमान बढ़ सकता है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ के असर की वजह से प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिल रहा था। इससे तापमान में भी कमी आई थी और लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन शनिवार से गर्मी बढ़ने के आसार नजर आने लगे हैं।

प्रदेश में पिछले दो दिन के भीतर तापमान में गिरावट आने के साथ मौसम खुशगवार हो गया था। शनिवार को दक्षिणी यूपी में बूंदाबांदी हो सकती है लेकिन बाकी जगहों पर मौसम शुष्क बना रहेगा। तापमान में वृद्धि भी दर्ज की जाएगी जिससे तेज गर्मी का अहसास होने लगेगा। इसके पश्चात आने वाले दिनों में तापमान में 06 डिग्री तक की बढ़ोतरी होने के आसार हैं।

वहीं, शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अपनी प्रगति में निरंतरता बनाए रखते हुए ओड़िसा, बिहार, झारखंड, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों, पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में दस्तक दे दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानि आईएमडी के मुताबिक मानसून की गति सामान्य है और आने वाले समय में यह और अधिक रफ्तार पकड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि आने वाले दो – तीन दिनों के दौरान की परिस्थितियां मानसून के और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। इसके प्रभाव से मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक के कुछ हिस्सों, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने की संभावना बन रही है। मानसून की सक्रियता बढ़ने से इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों में भी तेजी आने के आसार नजर आ रहे हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक, जून 2026 में अल नीनो सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में मानसून के दौरान इसके और अधिक ताकतवर होने की संभावना बन रही है। जून से सितंबर के दौरान अल नीनो मध्यम से मजबूत स्तर तक पहुंच सकता है।

वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर इस वर्ष मानसून पर अल नीनो का प्रभाव देखने को मिल सकता है और बारिश के सामान्य से कम रहने का खतरा भी बढ़ गया है। बता दें कि अल नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।

अल नीनो से दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है और भारत में इसके प्रभाव से मानसून अक्सर कमजोर पड़ जाता है। आमतौर पर अल नीनो भारत में वर्षा को कम कर सकता है, हालांकि मात्र अल नीनो के आधार पर मानसून का अंतिम अनुमान नहीं लगाया जा सकता। जून 2026 में समुद्र का तापमान अल नीनो की सीमा से ऊपर पहुंचा, इसलिए अल नीनो की स्थिति घोषित की गई।

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