उत्तराखंड: पूरे देश में जनगणना की अधिसूचना जारी की जा चुकी है जिसको लेकर उत्तराखंड में भी इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। पहली बार पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की जाएगी। वैसे तो जनगणना अगले वर्ष 09 से 28 फरवरी के बीच की जानी है लेकिन उत्तराखंड के 131 गांव, तीन कस्बों में इसी साल सितंबर में की जाएगी

जनगणना दो चरणों में की जाएगी, जिसमें पहला चरण मकान सूचीकरण का और दूसरा जनगणना का है। उत्तराखंड में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी ने पहले चरण की मकान गणना 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रस्तावित की है, जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अनुमोदन मिलना अभी शेष है। प्रदेश के रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी के जिलाधिकारियों से हिमाच्छादित क्षेत्रों के बारे में सूचना मांगी गई है। ऐसे 131 गांव और तीन कस्बों बदरीनाथ, केदारनाथ व गंगोत्री में जनगणना का काम इसी साल सितंबर महीने में किया जाएगा।

उत्तराखंड में जनगणना की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार से कहा है कि जनगणना कार्य के दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले न किए जाएं। साथ ही प्रदेश की प्रशासनिक सीमाएं भी सील हो चुकी हैं। 31 दिसंबर 2025 को प्रदेश में जो गांव था, वह गांव रहेगा, जो वार्ड, शहर, जिला जितना था, उसकी सीमा उतनी ही रहेगी। मार्च 2027 तक यही व्यवस्था लागू रहेगी।

यह जनगणना पूर्ण रूप से डिजिटल है, जिसमें सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से बैच बनाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। हर एक प्रगणन की प्र्रगति रिपोर्ट लाइव देखी जा सकेगी और यह पेपरलैस जनगणना है। प्रगणक को कागज नहीं बल्कि ऐप के माध्यम से जनगणना करनी है। खास बात ये है कि आम नागरिक भी अपनी मकान गणना और जनगणना खुद कर सकते हैं। इसके लिए जल्द ही पोर्टल लांच किया जाएगा। इस पर अपने मोबाइल नंबर से पंजीकरण कराने के बाद जनगणना प्रपत्र भरना होगा। इसके बाद एक आईडी प्रदान की जाएगी जिसे संभालकर रखना आवश्यक होगा। जब प्रगणक घर आएगा तो पहले स्व: गणना के बारे में सवाल पूछेगा। जनगणना प्रपत्र भरने से प्राप्त हुई आईडी उन्हें उपलब्ध करानी होगी, जिसमें दिए गए तथ्यों को मौके पर ही सत्यापित कर लिया जाएगा। अन्यथा की स्थिति में प्रगणक अपने ऐप के माध्यम से पूरी जानकारी भर लेगा।

2011 की जनगणना के अनुसार, प्रदेश में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें से 1048 गैर आबाद थे। जनगणना टीम 09 से 28 फरवरी 2027 के मध्य हर गांव तक पहुंचेगी। यदि वहां कोई मिलता है तो उसकी गणना की जाएगी अन्यथा ऐसे गैर आबाद गांवों की गणना की जाएगी।

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