उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य के मुद्दे पर एक बार फिर गहमागहमी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में कहा था कि कोई भी शंकराचार्य कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा था कि हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता। इस मामले में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि सीएम अपने नाम के सामने योगी लिखते हैं, लेकिन यह बताएं कि उन्हें यह लिखने का अधिकार किसने दिया है।
सीएम योगी ने सदन में शंकराचार्य विवाद पर पहली बार अपनी बात रखते हुए कहा कि क्या कोई मुख्यमंत्री, मंत्री, सपा अध्यक्ष बनकर क्या प्रदेश में सकता है ? शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और सम्मानित है। लेकिन हर काम नियम से होता है और सदन भी नियमों और परंपराओं से चलता है। कानून सबके लिए समान होता है तथा हम सभी संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल विद्वत परिषद द्वारा अधिकृत व्यक्ति ही शंकराचार्य बन सकता है। हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।
सीएम ने कहा कि माघ मेला में जिस दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु आए थे, वह उस दिन माघ मेला के निकास द्वार से जाने का प्रयास कर रहे थे। यह श्रद्धालुओं के जीवन को खतरे में डाल सकता था और वहां भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। भला कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा आचरण कैसे कर सकता है। हम मर्यादित लोग हैं। कानून का पालन करना और करवाना जानते हैं। उन्होंने सपा सदस्याें से पूछा कि यदि वह शंकराचार्य थे तो आपने वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज करने के साथ एफआईआर क्यों दर्ज कराई थी।
