नई दिल्ली: प्रचंड ठंड ने समूचे उत्तर भारत को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। सर्दी के सितम से लोगों में जोड़ों के दर्द की समस्या तेजी से उभर रही है। राजधानी दिल्ली में भी कंधों,कमर, घुटनों और उंगलियों सहित शरीर के अन्य जोड़ों में दर्द की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज प्रतिदिन अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच कर इलाज करा रहे हैं। यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों को ही परेशान नहीं कर रही है, बल्कि युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं रह गया है।
डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों के मौसम में सूजन, जोड़ों में दर्द, अकड़न और चलने में परेशानी होना आम समस्या हैं। कुछ व्यक्ति हल्का दर्द महसूस करते हैं, जबकि कुछ लोगों में दर्द और अकड़ाहट इतनी बढ़ जाती है कि रोजमर्रा के काम निपटाना भी मुश्किल हो जाता है। दिल्ली के एम्स, आरएमएल, सफदरंजग सहित अन्य सरकारी एवं निजी अस्पतालों में इस तरह की समस्या से जूझ रहे मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। दिसंबर से ठंड बढ़ी है और साथ ही जोड़ों के दर्द के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। डॉक्टर बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष सर्दियों में इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं और बुजुर्गों के साथ-साथ युवा वर्ग के मरीज भी शिकायतें लेकर ओपीडी में आते हैं।
हड्डी रोग विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों को पूर्व में कभी हड्डी में चोट लगी हो या किसी दुर्घटना के चलते फ्रैक्चर आदि हुआ हो, उन्हें सर्दियों में दर्द ज्यादा परेशान करता है। इसके अतिरिक्त, ठंड की वजह से शरीर में रक्त संचार सही तरीके से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से भी जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है।
डॉक्टर सुबह करीब आधा घंटा धूप में बैठने की सलाह देते हैं, जिससे शरीर की हड्डियों के लिए जरूरी विटामिन डी प्रचुर मात्रा में मिल सके।अपने आहार में हरी सब्जियां, दूध, दही, पनीर और नट्स शामिल करें। गर्म पानी से नहाना और गर्म पानी पीना भी दर्द में राहत प्रदान करता है।
ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में तापमान में गिरावट आने से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है, जिसका असर जोड़ों पर पड़ता है। सर्दी के मौसम में लोग शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं, जिससे जोड़ों में अकड़न और दर्द की समस्या में इजाफा हो जाता है। पुरानी चोट, फ्रैक्चर और शरीर में विटामिन डी की कमी होने से यह परेशानी ज्यादा तकलीफ देती है।
बुजुर्गों, मोटापे से ग्रस्त लोगों, मेनोपॉज से गुजर रही महिलाओं, आर्थराइटिस के मरीजों और कम सक्रिय जीवनशैली वाले व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। सर्दियों में भी योगा, स्ट्रेचिंग, टहलना और हल्की एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। गर्म कपड़े पहनकर अपने शरीर को ठंड से बचाने का प्रयास करना चाहिए।
