हिमाचल प्रदेश : राज्यसभा में सांसद हर्ष महाजन ने हिमाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र की अपार संभावनाओं और उससे जुड़ी चुनौतियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र की अपार संभावनाएं और उससे जुड़ी चुनौतियां हैं। यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश भारत के अति महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक है और यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था तथा लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि पिछले साल हिमाचल प्रदेश में लगभग 1.8 करोड़ घरेलू पर्यटक और करीब 80 हजार विदेशी पर्यटक आए, जो प्रदेश की लोकप्रियता और पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करता है। पर्यटन क्षेत्र प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है और लाखों लोगों के रोजगार से संबंधित है।
सांसद ने बताया कि हिमाचल प्रदेश को पिछले तीन वर्षों से भारत के सबसे स्वागतयोग्य क्षेत्रों में स्थान प्राप्त हुआ है और यह बुकिंग डॉट कॉम ट्रैवलर्स रिव्यू अवार्ड्स में विश्व के शीर्ष 10 क्षेत्रों में भी जगह बना चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। ज्वालाजी, कांगड़ाजी, चिंतपूर्णी, नैना देवी और चामुंडा के साथ ही किन्नौर कैलाश यात्रा और चंबा के लक्ष्मी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला, जहां परम पावन दलाई लामा निवास करते हैं, तथा लाहौल-स्पीति और लद्दाख क्षेत्र के प्राचीन बौद्ध मठ हिमाचल को वैश्विक स्तर पर बौद्ध पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एडवेंचर पर्यटन के क्षेत्र में भी विश्वस्तरीय पहचान रखता है। बीर-बिलिंग में पैराग्लाइडिंग, स्पीति और किन्नौर में ट्रैकिंग तथा सोलंग घाटी में स्कीइंग जैसे गतिविधियां पर्यटकों को विशेष रूप से पसंद आती हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के प्रसाद योजना, स्वदेश दर्शन और कनेक्टिविटी के सुदृढ़ीकरण जैसे कदमों से पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयां मिली हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में घोषित नए पर्यटन मार्गों और ट्रैक का विकास करने से हिमाचल प्रदेश को और अधिक लाभ प्राप्त होगा।
साथ ही सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिकी अत्यंत संवेदनशील है और हाल के वर्षों में बादल फटने, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि अनियोजित निर्माण, कचरा प्रबंधन की समस्या, पार्किंग और यातायात जाम जैसे मुद्दों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाधान निकालना अति आवश्यक है जिससे पर्यावरण की रक्षा और पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने पर्यटकों से भी अपील करते हुए कहा कि हिमालय सिर्फ पर्यटन स्थल नहीं बल्कि एक संवेदनशील प्राकृतिक धरोहर भी है। इसलिए यहां आने वालों को प्लास्टिक प्रदूषण, जंगलों को नुकसान पहुंचाने और अव्यवस्था फैलाने से बचना चाहिए ताकि स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण और समुदायों का सम्मान बना रहे।
उन्होंने केंद्र सरकार से निवेदन किया कि पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत संरचना के विकास को साथ लेकर जिम्मेदार और सतत पर्यटन मॉडल को आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि हिमाचल प्रदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित और समृद्ध बना रह सके।
