जम्मू: जम्मू-कश्मीर के लगभग सात हजार से ज्यादा लोग ईरान और खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं, जिनमें हज-उमरा के तीर्थयात्री और मेडिकल छात्र भी शामिल हैं और सभी वतन वापसी का इंतजार कर रहे हैं। सरकार इस संकट को देखते हुए सभी को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने और मदद पहुंचाने की योजना पर कार्य कर रही है।

विदित हो कि इस्राइल-अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया है जिसके चलते वहां के कई प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा है। ज्यादातर देशों ने अपने एयर स्पेस बंद कर दिए हैं और दूसरे देशों के लोग वहां हवाई अड्डों पर किसी तरह सुरक्षित वतन वापसी की आस लगाए इंतजार कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के सात  हजार से भी ज्यादा लोग ईरान समेत खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं।

इसमें अकेले जेद्दा एयरपोर्ट पर पांच हजार से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। ये वह लोग हैं, जो हज और उमरा के लिए गए थे और अब वतन वापसी का इंतजार कर रहे हैं। यूनाइटेड हज उमरा एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि इस वर्ष बीते वर्षों के मुकाबले अधिक लोग उमरा के लिए गए थे।

ईरान में जम्मू-कश्मीर के करीब तीन हजार छात्र फंसे हुए हैं। इनमें से ज्यादातर छात्र वहां मेडिकल की पढ़ाई के लिए गए थे। ऑल जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नासिर बताते हैं कि वे इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिख रहे हैं जिसमें वहां विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को हॉस्टल खाली करने को कहा जा रहा है। सबसे बड़ी परेशानी की बात यह है कि वहां हर वक्त एयर स्ट्राइक का खतरा बना हुआ है। सरकार के लिए तुरंत सभी को वतन वापस लाना तो संभव नहीं है लेकिन उन्हें वहीं किसी सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सकता है। मसलन उन्हें आर्मीनिया बॉर्डर या अजर बैजान बॉर्डर की ओर से शिफ्ट किया जाने का विकल्प हो सकता है।

अनुमान के मुताबिक, फंसे हुए लोगों की संख्या दोगुनी भी हो सकती है। एक हजार से ज्यादा लोग खाड़ी देशों में फंसे हो सकते हैं। इसके अलावा खाड़ी देशों जैसे कुवैत, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, यूएई में भारत से जाकर काम करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में हैं। ये  सभी अपने देश, अपने घर-परिवार के पास सुरक्षित लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

बारामुला जिले के सोपोर इलाके में उन परिवारों ने केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है जिनके बच्चे ईरान में रहकर  पढ़ रहे हैं। ईरान में बढ़ते तनाव, हवाई हमलों और अशांति के बीच माता-पिता ने अपने बेटे-बेटियों की सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करने की अपील की है। ईरान की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति ने भारतीय परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है। छात्रों से संपर्क भी मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि इंटरनेट बंदी और सेवाओं में बार-बार व्यवधान आ रहे हैं। ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने और यात्रा के बेहद सीमित विकल्प होने की वजह से स्वतंत्र रूप से वापसी लगभग असंभव हो गई है।

युद्ध के दौरान ईरान में पढ़ाई करने गए जम्मू-कश्मीर के मेडिकल छात्र फंसे हुए हैं। काउंसिल के रजिस्ट्रार के अनुसार, सभी को गृह मंत्रालय की ओर से जारी होने वाली एडवाइजरी का इंतजार है। इसके बाद स्पष्ट हो जाएगा कि वहां कितने मेडिकल छात्र फंसे हुए हैं। जम्मू कश्मीर मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार ने बताया कि कुछ छात्र युद्ध से पहले लौट आए हैं परंतु युद्ध के बाद की स्थितियों में अभी तक कोई भी मेडिकल छात्र ईरान से नहीं लौट पाया है।

जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानि जेकेएसए ने ईरान में बढ़तीं एयर स्ट्राइक के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से तुरंत दखल देने और भारतीय छात्रों खासकर प्रदेश से आए छात्रों को सुरक्षित जगहों पर भेजने में मदद करने की अपील की है। इनके अतिरिक्त ईरान समेत कई खाड़ी देशों में जम्मू-कश्मीर के लोग बड़ी संख्या में काम करने भी गए हुए हैं। इनमें से बहुत से ऐसे हैं, जिन्होंने मेडिकल से संबंधित कोर्स करके वहीं काम करना शुरू कर दिया है। इनके विषय में भी जानकारी एकत्रित की जा रही है।

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