नई दिल्ली: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई समिट में इस बार ऐसी उड़न गाड़ी का दीदार कराया गया जिसने लोगों को हैरानी में डाल दिया। उड़कर दफ्तर जाने का सपना अब यह सच होने वाला है। वर्तमान समय में तकनीक ने इतनी तरक्की कर ली है कि आने वाले समय में लोग कहेंगे सड़क से नहीं, हवा में उड़कर पहुंच रहा हूं।
दरअसल, भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई समिट में इस बार लोगों ने ऐसी उड़न गाड़ी देखी जिसने उन्हें हैरत में डाल दिया। हॉल नंबर चार में उपस्थित लोगों के बीच एक छोटी, हल्की और पूर्णतया बिजली से चलने वाली हवाई टैक्सी का मॉडल प्रदर्शित किया गया। कंपनी का दावा है कि यह उड़न टैक्सी शहर के जाम को समाप्त कर सकती है।
कंपनी के अनुसार, सड़क से पहुंचने में जहां काफी समय लगता है वहीं अब हवाई टैक्सी की सहायता से बहुत कम समय में हवा में उड़कर गंतव्य तक पहुंचा जा सकेगा। यह हवाई टैक्सी आमतौर पर ट्रेफिक में फंसे रहने वाले एंबुलेंस की समस्या से भी छुटकारा दिला सकती है। यह हवाई टैक्सी उन यात्रियों के लिए तैयार की जा रही है जो शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक तेजी से पहुंचना चाहते हैं। भविष्य में इसका उपयोग आपातकालीन सेवाओं और माल ढुलाई के लिए भी किए जाने की संभावना बन सकती है।
यह हवाई टैक्सी छोटी आकार की ऐसी उड़न मशीन है जो सीधे ऊपर उठ सकती है और सीधी नीचे उतर सकती है। इसका निर्माण खास तौर पर शहरों के अंदर छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए किया गया है। इस हवाई गाड़ी को जमीन पर उतरने के लिए सिर्फ 8×10 मीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे कम जगह में भी उतारा और उड़ाया जा सकता है। यह टैक्सी सिर्फ एक चार्ज में 110 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकने में सक्षम है और इसकी गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस टैक्सी में एक बार में एक पायलट के अलावा दो यात्री बैठ सकते हैं और यह 200 किलोग्राम तक वजन उठा सकती है।
यह परियोजना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास से जुड़ी एक कंपनी ने तैयार की है। कंपनी का लक्ष्य शहरों में लोगों का सफर आसान और तेज बनाना है। कंपनी के पास इस तकनीक से जुड़े कई पेटेंट हैं और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से इसे विशेष स्वीकृति भी मिल गई है। उड़न टैक्सी के परीक्षण और अंतिम प्रमाणन की प्रक्रिया अभी जारी है।
कंपनी के मुताबिक बढ़ते शहरों में जाम और वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बन गए हैं। कहीं जाने-आने में घंटों का समय बर्बाद होता है। अगर यह उड़न टैक्सी आम लोगों तक पहुंच जाती है, तो समय की बचत तो होगी ही साथ ही प्रदूषण भी कम होगा और आपातकालीन सेवाएं तेज हो जाएंगी। प्रारंभिक दौर में इसे प्रशिक्षित पायलट उड़ाएंगे लेकिन आगे चलकर नियमों की अनुमति मिलने पर इसे बिना पायलट के भी संचालित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। फिलहाल यह तकनीक अभी परीक्षण के दौर में है, लेकिन अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा, तो आने वाले वर्षों में महानगरों के आसमान में छोटी-छोटी उड़न टैक्सियां दिखाई देना आम नजारा होगा।
