नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को अन्य पार्टी नेताओं के साथ हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की।
विदित हो कि दिल्ली की विशेष अदालत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील आबकारी घोटाले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के कविता और 20 अन्य लोगों को आरोप मुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गंभीर संदेह तो दूर की बात है, इसमें तो प्रथमदृष्टया मामला भी नहीं बन रहा है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले में सीबीआई की चार्जशीट को खारिज कर दिया। स्पेशल जज ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को आरोप तय करने से इनकार करते हुए बरी कर दिया। अदालत ने सीबीआई के आरोपों को अपर्याप्त, विरोधाभासी और बिना ठोस सबूतों के बताते हुए जांच एजेंसी की थ्योरी को कमजोर बताया। इस फैसले के पश्चात शनिवार को केजरीवाल और सिसोदिया ने पार्टी नेताओं के साथ दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की।
बता दें कि इस मामले की शुरुआत 2022 में हुई थी, जब सीबीआई ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी 2021-22 में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (आरोपी-8) और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (आरोपी-18) समेत अन्य ने निजी शराब कारोबारियों के साथ मिलीभगत कर नीति को प्रभावित किया, जिससे करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया गया। सीबीआई की मुख्य चार्जशीट और चार पूरक चार्जशीट्स में कुल 23 आरोपी बनाए गए थे, जिनमें विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, समीर महेंद्रू, के. कविता और अन्य शामिल थे। आरोप थे कि नीति में बदलाव से थोक विक्रेताओं को 12% मार्जिन दिया गया, जो कथित तौर पर रिश्वत के रूप में आरोपियों ने आपस में बांट लिया गया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे जांच पूर्वनिर्धारित दिशा में आगे बढ़ी, जिसमें नीति बनाने या कार्यान्वयन से जुड़े लगभग हर व्यक्ति को फंसाया गया, ताकि अन्यथा कमजोर कहानी को गहराई और विश्वसनीयता का भ्रम दिया जा सके। कोर्ट ने कहा कि कानूनी रूप से स्वीकार्य सामग्री के अभाव में बड़ी व जटिल साजिश का आभास पैदा करने की कोशिश की जाती है। कोर्ट द्वारा हिदायत भी जारी की गई कि अनुमान एवं धारणा के स्थान पर जांच एजेंसियों को निष्पक्षता के साथ सिर्फ प्रामाणिक एवं ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही मुकदमे दायर करने चाहिएं।
अपने 598 पन्नों के आदेश में कोर्ट ने कहा कि यह मामला आपराधिक अभियोजन की बुनियादी शर्तों को भी पूरा नहीं करता है। ऐसे में आरोपी संख्या 1 से 23 को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है। दिल्ली एक्साइज पॉलिसी घोटाले में सीबीआई की हजारों पन्नों की चार्जशीट को राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। स्पेशल जज ने अपने आदेश में कहा कि मुख्य चार्जशीट (24 नवंबर 2022) और चार पूरक चार्जशीटों में अपराध का एक भी ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है। अदालत ने सीबीआई जांच को विरोधाभासी और हेरफेर से भरी बताते हुए जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की। जज ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दस्तावेज गवाहों के बयानों से मेल नहीं खा रहे हैं, अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा जिससे इसमें कोई आपराधिक साजिश का साक्ष्य नहीं मिल पाया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान एजेंसी पर कई बार नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हजारों पेजों में पेश तथ्य गवाहों के बयानों से मेल नहीं खाते। फैसले में जेल में बिताए समय पर भी टिप्पणी की। अदालत ने नोट किया कि मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे, जबकि अरविंद केजरीवाल दो बार के अंतराल में 156 दिन हिरासत में रहे।
