उत्तराखंड: उत्तराखंड में अब पंचायत घरों के निर्माण के लिए सरकार द्वारा दोगुनी धनराशि आवंटित की जाएगी। पंचायत विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शासन को इसके लिए प्रस्ताव अग्रसित किया गया है। वित्त विभाग से इसकी मंजूरी मिल जाने पर कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल बीत जाने के पश्चात भी बहुतेरी ग्राम पंचायतों में पंचायत घर नहीं है।

पंचायती राज विभाग के मुताबिक पंचायत घरों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार की तरह धनराशि को 20 लाख रुपये किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को अग्रसित किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य में पंचायत घरों के निर्माण के लिए राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए 20 लाख रुपए दिए जाते हैं। धनराशि पर्याप्त न होने के कारणवश राज्य सेक्टर से मिलने वाली धनराशि से पंचायत घरों का निर्माण नहीं हो पा रहा है।

विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य में 1300 से ज्यादा पंचायत घरों का निर्माण होना हैं। इसमें से 800 से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें पंचायत घर नहीं है। जबकि अन्य में ग्राम पंचायत भवन जर्जर हालत में हैं। इस विषय में सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित दून लाइब्रेरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुना। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 27 जनवरी को यूसीसी के एक साल पूरा होने पर इस दिन को राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन बताया।

देश की आजादी के बाद संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 44 में इस बात का प्रावधान किया था कि देश में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए। उसे सबसे पहले लागू करने का कार्य उत्तराखंड के लोगों ने किया है जिसका एक साल सफलता पूर्वक पूरा होने जा रहा है।

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