हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में आईटीबीपी किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उत्पादकों से सीधे उत्पाद खरीदेगी। इसे लेकर आईटीबीपी के कमांडर आईजी और सेक्टर कमांडर डीआईजी ने प्रदेश के मुखिया सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मुलाकात की।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजी सब्जियों, फलों, दूध, पनीर, मांस, ट्राउट मछली और अन्य कृषि उत्पादों की खरीद के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर रही है। इस व्यवस्था के तहत, आईटीबीपी सीधे किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उत्पादकों से उत्पाद खरीदेगी। इस पहल से किसानों को उनके अपने ही गांवों में एक भरोसेमंद बाजार उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उनकी आय के अवसर बढ़े जाएंगे और बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो जाएगी।
आईटीबीपी के इस कदम से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, बागवानों और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के नवीन अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है, साथ ही यह समावेशी और टिकाऊ क्षेत्रीय विकास में भी योगदान प्रदान करेगा।
यह प्रगतिशील निर्णय किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में उनकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। इस कदम से किसानों को सीधे बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराकर बागवानों और ग्रामीण परिवारों के लिए टिकाऊ रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसके लिए आईटीबीपी के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सहयोग की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करने के लिए एक बैठक की।
चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि यह पहल न केवल स्वरोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि सीमावर्ती गांवों की आर्थिक संरचना को भी मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस व्यवस्था से होने वाले परस्पर लाभों पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे आईटीबीपी को ताजा और स्थानीय रूप से उगाए गए उत्पाद मिल सकेंगे और किसानों को भी अपने आस-पास ही एक स्थिर और भरोसेमंद बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
सीएम ने कहा कि इस पहल से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने के साथ, सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और ग्रामीण आबादी के लिए दीर्घकालिक व टिकाऊ आजीविका के मार्ग बनेंगे। इसके अतिरिक्त, इस कदम से बुनियादी ढांचे के विकास में मदद मिलने और सीमा प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है। आईटीबीपी के आईजी ने बताया कि इसी तरह का एक मॉडल उत्तराखंड में पहले ही सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिसक काफी उत्साहवर्धक नतीजे सामने आए हैं।
हिमाचल प्रदेश में भी इसकी सफलता पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल से सीमावर्ती गांवों के निवासियों को काफी लाभ पहुंचेगा। आयोजित बैठक में सुधारित वितरण क्षेत्र योजना के तहत सीमा चौकियों के विद्युतीकरण पर भी चर्चा की गई, जिसका मकसद दूरदराज के क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना है।
