मध्य प्रदेश: स्वच्छता में निरंतर आठ बार शीर्ष पर रहने वाले इंदौर ने अब ‘नो थू-थू’ अभियान का श्रीगणेश किया है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के बदले हुए नियमों को देखते हुए मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने स्वयं सड़कों पर उतरकर दीवारों से पान-गुटखे के दाग हटाए।

आठ साल से निरंतर स्वच्छता में नंबर वन का खिताब हासिल करने वाले इंदौर नगर निगम ने अपना क्रम पहले नंबर पर बरकरार रखने के लिए फिर से कमर कस ली है। शहर में नो थू-थू अभियान शुरू किया जा चुका है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वे पान-गुटखे की पीक सड़कों पर या सार्वजनिक दीवारों पर न थूकें। इस कड़ी में मेयर अभियान की अगुवाई करते हुए सरवटे बस स्टैंड पहुंचे और लाल धब्बों के निशान साफ किए। उनके साथ खड़े बच्चों व युवकों ने तख्तियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि शहर को स्वच्छ बनाना है।

दरअसल इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के नियमों में बदलाव हुआ है। सर्वेक्षण के लिए कुल 12,500 अंक निर्धारित किए गए हैं। रैंकिंग सुधारने के लिए शहरों को कचरा प्रबंधन को और अधिक व्यापक बनाना होगा। इस बार रैंकिंग सिर्फ कचरा उठाने से तय नहीं की जाएगी। सार्वजनिक स्थानों और सरकारी दफ्तरों की दीवारों पर पान-गुटखा के दाग मिलने पर रैंकिंग नीचे पहुंच सकती है। शहरों को रेड स्पॉट मुक्त बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है जिसके अंतर्गत इंदौर नगर निगम ने भी नो थू-थू अभियान प्रारंभ किया है।

इसके अलावा डिजिटल फीडबैक और निगरानी जनता से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को पूरे वर्ष के लिए खुला रखा गया है। लोग वोट फॉर माय सिटी ऐप, स्वच्छता ऐप और क्यूआर कोड के माध्यम से अपनी राय प्रस्तुत कर सकते हैं। कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन निगरानी और डिजिटल ऑडिट भी किया जाएगा।

शहर में सबसे ज्यादा रेड स्पॉट सिग्नलों के डिवाइडरों पर पाए जाते हैं। चालक जब सिग्नल पर रुकते हैं तो वे गुटखा थूकते हैं और उसके दाग डिवाइडरों पर पड़ जाते हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, सार्वजनिक दीवारों तथा शौचालयों में भी सबसे ज्यादा रेड स्पॉट पाए जाते हैं।

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