उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में बरेली के एक मौलाना ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म किए जाने के फैसले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर निशाना साधा है। मौलवी ने कहा कि उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म करना धामी सरकार की एक बड़ी गलती है। उन्होंने सीएम से मदरसों का इतिहास पढ़ने को कहा और जिहाद जैसे आरोप लगाना भी गलत ठहराया। 

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को खत्म किए जाने और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान पर कहा कि मदरसों पर इल्ज़ाम लगाना और मदरसा बोर्ड को खत्म करना एक बड़ी गलती है। उन्होंने कहा कि मदरसों ने देश की आजादी में कुर्बानियां दी हैं जिसमें मदरसों से जुड़े लगभग 55 हजार उलमा और छात्र अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। वर्ष 1857 से लेकर 1947 तक और फिर ऑपरेशन सिंदूर के वर्ष 2025 के दौरान इन मदरसों के उलमा भारत के समर्थन में खड़े रहे।

मौलाना ने कहा कि इन मदरसों का इतिहास जाने बिना ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी जिहादी शिक्षा की बात कह रहे हैं। इस तरह का इल्ज़ाम लगाना असंवैधानिक और इतिहास के विरुद्ध है। संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्तियों को शिक्षक संस्थाओं में सुधार की बातें और कार्य करने चाहिएं, लेकिन वर्तमान में कुछ लोग सिर्फ उन्हें बदनाम करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने 250 मदरसों पर ताले जड़ दिए और 125 सूफियों की मजारों पर बुलडोजर चला दिए। इस तरह का कार्य तो उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी नहीं किया। उत्तराखंड सरकार इस्लामी धार्मिक शिक्षा को खत्म करने पर उतारू है।

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान था कि उत्तराखंड में पनप रही विभाजनकारी सोच को रोकने के लिए राज्य मदरसा बोर्ड समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। परन्तु इन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी इस देश और समाज की प्रगति में अपना योगदान प्रदान करते हैं। उनको वही पाठ्यक्रम पढ़ाया जाना चाहिए जो हमारे शिक्षा बोर्ड के द्वारा तय किया गया है। धामी ने  कहा था कि जुलाई 2026 से इन संस्थानों में भी एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, लेकिन हम नहीं चाहते कि ये स्थान जिहादी सोच का अड्डा और अलगाववाद का केंद्र बनें।

बता दें कि प्रदेश के मदरसों को धार्मिक शिक्षा के लिए शैक्षिक सत्र 2026-27 से नए सिरे से मान्यता प्राप्त करनी होगी तथा राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से उन्हें मान्यता प्रदान की जाएगी। मान्यता इस शर्त पर दी जाएगी कि मदरसों को धार्मिक शिक्षा के लिए प्राधिकरण की ओर से तैयार किया गया कोर्स पढ़ाना अनिवार्य होगा।

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 में स्पष्ट बताया गया है कि राज्य में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त कोई भी मदरसा शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंत तक ही शिक्षा प्रदान करना जारी रख पाएगा। ऐसे मदरसों को शैक्षिक सत्र 2026-27 से धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के लिए दोबारा से मान्यता प्राप्त करनी होगी।

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