उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में गैस की किल्लत और औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ने से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तकरीबन 50 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गईं हैं। उद्यमियों को आशंका सताने लगी है कि ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच युद्ध और कुछ दिनों तक जारी रहा तो हालात काबू के बाहर हो सकते हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद बदले हालात में उद्यमियों को डीजल के लिए अतिरिक्त मूल्य चुकाना पड़ रहा है। साथ ही आईजीएल की ओर से उद्यमियों को नोटिस भेजकर पीएनजी का वैकल्पिक साधन खोजने की अपील की गई है जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। इस बीच बढ़ती महंगाई की वजह से श्रमिकों की वेतन वृद्धि की मांग ने उद्यमियों की चिंता में इजाफा कर दिया है। उद्यमियों ने आशंका जताई है कि ईरान-इस्राइल व अमेरिका के बीच युद्ध यदि कुछ और दिनों तक जारी रहा तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे।
उद्यमियों के अनुसार, जिले में 2200 से ज्यादा प्लास्टिक विनिर्माण इकाइयां स्थापित हैं। इसके अलावा होजरी व गारमेंट की 15 हजार से ज्यादा इकाइयां और ऑटोमोबाइल की तकरीबन 4 हजार इकाइयां हैं। इसके अतिरिक्त रबर, सिल्क, सिंथेटिक फाइबर सहित अन्य उत्पादन इकाईयां भी हैं जिनमें बनने वाले उत्पाद देश और विदेश में निर्यात किए जाते हैं। युद्ध की वजह से कच्चे माल की उपलब्धता में कमी होती जा रही है।
नोएडा और एनसीआर की कंपनियों ने डीजल के विकल्प की जगह पीएनजी का उपयोग शुरू कर दिया था लेकिन अब उद्यमियों को इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड की ओर से भेजे गए नोटिस में वैश्विक उथल पुथल के बीच वैकल्पिक व्यवस्था बनाने को कह दिया गया है।
पीएनजी की सप्लाई कभी भी बाधित होने की आशंका से जूझ रहे उद्यमियों के मुताबिक सरकारी विभागों से भी उन्हें कोई रास्ता नहीं सुझाया जा रहा है कि वह किस विकल्प को अपनाएं। दूसरी तरफ शुक्रवार को औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ने से भी हजारों उद्योगों में उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका बन गई है।
एनईए अध्यक्ष ने साझा किया कि युद्ध के चलते एलपीजी गैस महंगी हुई जिससे खाने पीने के पदार्थ भी महंगे हो गए हैं। होटल रेस्तरां समेत तमाम सेक्टर के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके साथ ही अब उद्योगों में काम करने वाले लाखों श्रमिक वेतन बढ़ाने के लिए दबाव बना रहे हैं और साथ ही काम छोड़ने की भी चेतावनी दे रहे हैं।
जिले में करीब 2000 से ज्यादा धातु कारोबारी हैं जिनमें लोहा, स्टील, कॉपर, तांबा समेत अन्य धातुएं भी शामिल हैं। युद्ध शुरू होने के तीन दिन बाद से ही इनके दाम तीन गुना तक बढ़ गए हैं जिससे भवन निर्माण समेत तमाम निर्माण कार्यों की लागत में भी इजाफा हो गया है।
