उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मेरठ कैंट में भी नोएडा जैसी ही दुर्घटना का मामला सामने आया है। यहां के कैंट क्षेत्र में खुले नाले पर बाउंड्री वॉल न होने के कारण एक ई-रिक्शा चालक की उसमें गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। मेरठ में भी नोएडा जैसे हादसे की पुनरावृत्ति ने उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोएडा के सेक्टर-150 में खुले नाले की वजह से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला हुए अभी सप्ताह भी नहीं बीता है कि मेरठ के कैंट बोर्ड की लापरवाही ने वैसे ही एक और जान ले ली। शुक्रवार शाम आबूलेन स्थित काठ के पुल के पास नाले पर बाउंड्री न होने की वजह से एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर सीधे नाले में जा गिरा। हादसे में ई-रिक्शा के नीचे दब जाने और गंदे पानी में डूबने से चालक की दर्दनाक मौत हो गई। शहर के खुले और जर्जर नाले लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं, जो नगर निगम की कार्यशैली पर सवालिया खड़े कर रहे हैं।
जिस प्रकार नोएडा में युवराज घंटों मदद का इंतजार करता रहा ठीक वैसा ही मंजर मेरठ में भी देखने को मिला। ई रिक्शा चालक करीब आधे घंटे तक नाले में अपने ई-रिक्शा के नीचे दबा रहा। इस दौरान भीड़ तमाशबीन बनी रही और पुलिस भी सूचना के आधे घंटे बाद मौके पर पहुंची। अगर समय रहते रेस्क्यू कर लिया जाता तो शायद सनी की जान जाने से बच सकती थी। मेरठ शहर में आबूनाला, ओडियन नाला सहित कई और नालों की दीवारें जगह-जगह से टूटी हुई हैं जिससे खतरा उत्पन्न हो रहा है। इसके बावजूद नगर निगम और संबंधित विभागों की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
आबूलेन क्षेत्र में नाले में गिरकर ई-रिक्शा चालक की मौत ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को स्पष्ट तौर पर लापरवाही का नतीजा माना जा सकता है।
इस हादसे के बाद मचे शोर – शराबे को सुनकर भीड़ तो जुटी लेकिन किसी ने रिक्शा चालक को बाहर निकालने की कोशिश नहीं की। घटना की सूचना मिलने के करीब 30 मिनट बाद पहुंची सदर बाजार पुलिस ने लोगों की मदद से चालक को नाले से बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाने के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया जिसके बाद पुलिस ने पंचनामा भर शव परिजनों को सौंप दिया।
यह हादसा पूरी तरह से प्रशासनिक उपेक्षा का नतीजा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे लंबे समय से नाले की दीवार बनवाने की मांग की जा रही है, लेकिन कैंट बोर्ड के अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। काठ के पुल से रजबन की तरफ जाने वाली सड़क पर ढलान होने से अक्सर वाहन तेज गति में अनियंत्रित हो जाते हैं। यहां पूर्व में भी कई वाहन नाले में गिर चुके हैं लेकिन बावजूद इसके सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
