हिमाचल प्रदेश : सूत्रों की मानें तो जल्द ही हिमाचल प्रदेश में जनता को तीसरा राजनीतिक विकल्प मिलने की संभावना है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल्लू की वादियों में दो दिन पूर्व भुंतर व बजौरा क्षेत्र में तीसरे मोर्चे की नींव रखने के लिए एक गुपचुप बैठक आयोजित की गई थी।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर हिमाचल प्रदेश की राजनीति में तीसरे राजनीतिक विकल्प की सुगबुगाहट सामने आने लगी है। पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय कुल्लू के पश्चात सोमवार को बिलासपुर पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा और कांग्रेस से नाराज चल रहे नेताओं के साथ बैठक की।
इस बैठक में प्रदेश के करीब आठ से दस जिलों के पूर्व मंत्री व पूर्व विधायकों ने हिस्सा लिया। बताया जा रहा है कि इस बैठक में दो दर्जन पूर्व मंत्री व पूर्व विधायकों सहित कुल करीब 40 नेता सम्मिलित हुए थे। ये वह नेता थे जिनका 2022 के विस चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ने टिकट काट दिया था और कुछ नेता लंबे समय से नाराज़ चले आ रहे हैं। तीसरे विकल्प की संभावना को लेकर इन नेताओं ने आने वाले विधान सभा चुनावों को लेकर रणनीति पर मंथन किया।
साथ ही जुखाला के आसपास कुछ प्रभावशाली नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि किसी भी राष्ट्रीय दल के साथ समझौता करने के बजाय हिमाचल के हितों को केंद्र में रखकर एक मजबूत क्षेत्रीय मंच तैयार किया जाना चाहिए। बैठक में मौजूद नेताओं के बीच इस बात पर भी विचार विमर्श हुआ कि प्रदेश के महत्वपूर्ण फैसले दिल्ली के बजाय हिमाचल की परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर होने चाहिएं। नेताओं का मानना कि प्रदेश की नीतियों में स्थानीय संसाधनों और जनता की प्राथमिकताओं को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
बैठक में प्रदेश पर बढ़ते हुए कर्जभार को लेकर भी चिंता जताई गई। चर्चा के दौरान सुझाव दिया गया कि हिमाचल को कर्ज पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा और पर्यटन के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने चाहिएं। प्रदेश के वनों में उपलब्ध संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और पर्यटन ढांचे को मजबूत कर प्रदेश की आय में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, संभावित तीसरे मोर्चे को लेकर फिलहाल किसी एक चेहरे को आगे करने की अपेक्षा पहले मजबूत संगठन खड़ा करने पर सहमति बनी है। इसके तहत ब्लॉक और जिला स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने और उसके बाद नेतृत्व के औपचारिक एलान की रणनीति पर परिचर्चा हुई। बैठक में शामिल हुए कई नेताओं का अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली जनाधार है।
ऐसा अनुमान भी लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी बैठकों के जरिये संभावित तीसरे मोर्चे के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
