मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के इंदौर में चूहों द्वारा शास्त्री ब्रिज के नीचे सुरंग बना कर उसे खोखला किए जाने का एक अनूठा मामला सामने आया है। खोखले किए जा रहे शास्त्री ब्रिज को बचाने के लिए इंदौर नगर निगम द्वारा विशेष मरम्मत कार्य शुरू किया जा चुका है जिसके तहत आसपास की सड़कों की मरम्मत की जा रही है। नगर निगम ने शहर के लिए महत्वपूर्ण शास्त्री ब्रिज की सुरक्षा और सुंदरता को बढ़ाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल करना शुरू कर दिया है। इस योजना के अंतर्गत समूचे शास्त्री ब्रिज के फुटपाथों की खुदाई का कार्य किया जा रहा है। यहां पुराने ढांचे को हटाकर केमिकलयुक्त विशेष मटेरियल भरा गया है, जिसके ऊपर नई और अधिक भार क्षमता वाली हैवी इंटर लाकिंग टाइल्स लगाई जा रही हैं। इस कार्य से ब्रिज की आधारभूत संरचना को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
नगर निगम के अधिकारियों ने पिछले दिनों एसजीएसआईटीएस के विशेषज्ञों के साथ शास्त्री ब्रिज का संयुक्त दौरा किया था। दौरे के दौरान किए गए गहन निरीक्षण में यह तथ्य सामने आया कि चूहों ने खुदाई करके ब्रिज का आंतरिक हिस्सा खोखला कर दिया है। विशेषज्ञों की सलाह पर तैयार कार्ययोजना के आधार पर अब फुटपाथ की जमीन पर केमिकलयुक्त मटेरियल के साथ कांच के टुकड़ों की एक परत भी बिछाई जा रही है। इस कार्यप्रणाली से चूहों को जमीन के भीतर सुरंग बनाने से रोक जा सकेगा और ब्रिज को किसी भी प्रकार की संरचनात्मक क्षति से महफूज रखा जा सकेगा।
इंदौर नगर निगम द्वारा किया जा रहा सुधारात्मक कार्य केवल ब्रिज तक सीमित नहीं है। रीगल स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में भी चूहों द्वारा जमीन खोखली किए जाने संबंधी शिकायतें मिली थीं, जिसके चलते वहां भी इंटर लाकिंग टाइल्स लगाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन और रीगल के आसपास के अन्य हिस्सों में पैदल यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए पुरानी टाइल्स को हटाकर नई हैवी लॉकिंग टाइल्स लगाई जा रही हैं।
जहां एक ओर इंदौर नगर निगम द्वारा सौंदर्यीकरण का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है, वहीं जवाहर मार्ग से चंद्रभागा तक की सड़क का निर्माण अब भी चुनौतियों से घिरा हुआ है। वर्षों बीत जाने के बाद भी इस सड़क की केवल एक लेन ही तैयार हो पाई है, जबकि दूसरी लेन का काम कानूनी अड़चनों के चलते अटका हुआ है। सड़क निर्माण के दौरान कई दुकानों और मकानों के निर्माण में बाधा बने हिस्सों को हटाया जा चुका है, लेकिन कुछ धार्मिक स्थलों और निजी संपत्तियों के कारण मामला अब भी पेचीदा बना हुआ है। प्रशासन का प्रयास इन सभी बाधाओं को जल्द से जल्द दूर कर चंद्रभागा तक का सड़क निर्माण संपूर्ण करना है।
