नई दिल्ली: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में कड़ी टिप्पणी की है। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए जानवर प्रेमियों और उन्हें खाना खिलाने वालों को भी जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराया जाए।
सर्वोच्च न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले पर अहम सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के हमलों से होने वाली किसी भी चोट या मौत के लिए अधिकारियों और कुत्ते पालने वालों, दोनों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जो लोग आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित हैं, उन्हें कुत्तों को अपने घरों में ले जाना चाहिए। कुत्तों को सड़क पर छोड़कर भय का माहौल नहीं बनने देना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट पीठ ने आवारा कुत्तों के मुद्दे से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए कुत्ता प्रेमियों और उन्हें भोजन उपलब्ध कराने वालों को भी जवाबदेह और जिम्मेदार ठहराया जाएगा। अदालत ने आगे कहा कि कुत्तों के काटने से मृत्यु या चोट के प्रत्येक मामले के लिए हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा वसूलने की मांग करेंगे। सरकारों ने विगत पांच वर्षों में नियमों के कार्यान्वयन के विषय में कोई तरक्की नहीं की है। साथ ही इन आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। अगर आपको इन जानवरों से इतना ही प्रेम है, तो आप उन्हें अपने घर में जगह क्यों नहीं देते ? ये कुत्ते इधर-उधर घूमकर क्यों लोगों को डराते और काटते हैं ?
विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर, 2025 के अपने आदेश में संशोधन की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसने अधिकारियों को संस्थागत क्षेत्रों और सड़कों से इन आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट गत वर्ष जुलाई में शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है, जो राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली बीमारियों, मुख्य रूप से बच्चों के बारे में एक मीडिया रिपोर्ट से संबंध रखता है।
