हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई पैटर्न पर संचालित किए जा रहे सरकारी स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात तय कर दिया गया है और इसे लेकर लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। राज्य सरकार की ओर से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीबीएसई स्कूलों में छात्रों की संख्या और शिक्षकों की तैनाती को लेकर कठोर मानक निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों के लागू हो जाने के पश्चात कक्षाओं में छात्रों की अधिकता में कमी आएगी और उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। नई व्यवस्था में नर्सरी से बारहवीं तक हर एक कक्षा में दो-दो सेक्शन अनिवार्य कर दिए गए हैं। इससे साफ हो गया है कि प्रदेश में सीबीएसई पैटर्न पर संचालित सरकारी स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को लेकर कोई ढिलाई नहीं चल पाएगी।
इसके साथ ही प्रत्येक सेक्शन में विद्यार्थियों की अधिकतम संख्या भी निर्धारित कर दी गई है। नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक एक सेक्शन में अधिकतम 30 विद्यार्थी, छठी से आठवीं कक्षा तक एक सेक्शन में अधिकतम 35 विद्यार्थी और 9वीं से 12वीं कक्षा तक एक सेक्शन में अधिकतम 40 विद्यार्थी ही पढ़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि तय सीमा से अधिक छात्रों की वजह से शिक्षण की गुणवत्ता तो प्रभावित होती ही है, बल्कि साथ ही शिक्षक भी विद्यार्थियों पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। नए मानकों के अनुरूप, यह सुनिश्चित हो जाएगा कि हर कक्षा और हर विषय के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध रहेंगे। सरकार का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य विद्यार्थियों को बोझ रहित और गुणवत्ता से पूर्ण शिक्षा देना है। छात्र संख्या मानक के अनुरूप होने से कक्षाओं में छात्र शिक्षक संवाद के अवसर बढ़ जाएंगे जिसके फलस्वरूप शिक्षा में नवाचार का संचार होगा।
सरकार के इस फैसले से अभिभावकों को भी राहत प्राप्त होगी। कक्षाओं में विद्यार्थी संख्या सीमित होने से बच्चों की प्रगति पर बेहतर तरीके से नजर रखी जा सकेगी और कमजोर छात्रों का अतिरिक्त सहयोग किया जा सकेगा। इन मानकों को चरणबद्ध तरीके से सभी सीबीएसई स्कूलों में लागू किया जाएगा। जिस स्कूल में शिक्षक की या आधारभूत ढांचे की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर पद सृजन कर नियुक्तियां की जाएंगी। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला सीबीएसई स्कूलों के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहायक बनेगा।
