हरियाणा: सूरजकुंड मेले का 15वां दिन शनिवार को वेलेंटाइन स्पेशल रहा। आम दिनों की अपेक्षा शनिवार को मेले में पर्यटकों की अधिक भीड़ उमड़ी और पर्यटन विभाग के अनुसार करीब साढ़े तीन लाख से ज्यादा सैलानियों ने मेले का लुत्फ उठाया। रविवार को मेले का समापन हो रहा है जिसके चलते इस दिन भी भारी भीड़ उमड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
शनिवार को सुबह से ही मेला परिसर में पर्यटक पहुंचने प्रारंभ हो गए थे। दोपहर तक मुख्य और छोटी चौपाल पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। चौपाल पर प्रस्तुति दे रहे कलाकारों का उत्साह दर्शकों की संख्या देखकर दोगुना हो गया। शाम को निकले कार्निवल को देखने के लिए सैलानियों में काफी उत्साह नजर आया। मेले में देर रात तक लोग सेल्फी लेते और व्यंजनों का आनंद उठाते रहे।
हालांकि भारी भीड़ की वजह से सूरजकुंड मार्ग पर करीब चार – पांच किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा, जिसके चलते दोपहर से लेकर रात तक सैलानी जाम से जूझते रहे। यातायात कर्मियों को व्यवस्था बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी।
मेले में शिल्पकारों और स्टॉल संचालकों की तरफ से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 50 प्रतिशत तक की छूट की पेशकश की जा रही थी। देशी-विदेशी परिधानों, आभूषणों, सजावटी वस्तुओं, लकड़ी और जूट उत्पादों पर विशेष छूट दी जा रही है। तय कार्यक्रम के अनुसार, मेले के समापन समारोह में हरियाणा के राज्यपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
पर्यटन विशेषज्ञों के मुताबिक , ऐसे आयोजन देश के पर्यटन परिदृश्य को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। सूरजकुंड मेला केवल हस्तशिल्प प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच बनकर उभर रहा है। यहां महाराष्ट्र के स्ट्रीट फूड से लेकर उत्तर-पूर्वी राज्यों के व्यंजन तक पर्यटकों को देश की विविधता का स्वाद परोस रहे हैं। यही बहुआयामी अनुभव विदेशी यात्रियों के लिए पारंपरिक स्मारक यात्राओं से आगे बढ़कर भारत के जीवंत सांस्कृतिक आयोजनों की ओर आकर्षित होने का प्रमुख कारक बन रहा है।
समापन समारोह के सफल आयोजन के लिए पर्यटन निगम हरियाणा और मेला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। आयोजन स्थल पर अतिथि सत्कार, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, मंच संचालन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के सुव्यवस्थित संचालन हेतु व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि आगंतुकों को किसी प्रकार की कोई असुविधा न होने पाए। तकरीबन दोपहर 3 बजे आयोजित होने वाले इस समारोह में देश-विदेश से आए शिल्पकारों, हस्तशिल्प विशेषज्ञों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को सम्मानित करने का भी कार्यक्रम है।
