उत्तराखंड : उत्तराखंड में अब सीबकथॉर्न हिमालयी क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर सीबकथॉर्न के उत्पादन की योजना तैयार कर रही है। वन विभाग द्वारा राज्य के पिथौरागढ़ जिले के दारमा और व्यास घाटी में इसकी खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
सीबकथॉर्न (Sea Buckthorn), जिसे लेह बेरी या डालेचुक भी कहते हैं, यूरोप और एशिया में पाया जाने वाला एक कांटेदार औषधीय पौधा है, जिसके चमकीले नारंगी फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। यह फल त्वचा, बालों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं ।
यह औषधीय गुणों से भरपूर होने के साथ ही पर्यावरणीय की दृष्टि से बहुत उपयोगी वृक्ष है। उच्च हिमालय क्षेत्रों में रेतीली भूमि होने के चलते भूमि का कटाव अधिक होता है। सीबकथॉर्न की जड़ें भूमि कटाव रोकने में बहुत सक्षम होती हैं। सीबकथॉर्न की बनाई गई स्क्वैश का सेवन चेहरे और ओवर ऑल हेल्थ के लिए बेहतरीन माना जाता है।ऐसे में लाहौल घाटी में महिलाओं द्वारा जंगलों से ये छोटी-छोटी बेरी इकठ्ठा करके अब बाजारों में भी इसे बेचा जा रहा है। बाजार में इसके फल और जूस की मांग को देखते हुए प्रदेश सरकार उच्च हिमालय क्षेत्रों में इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजना बना रही है। सीबकथॉर्न समुद्रतल से करीब चार हजार मीटर की ऊंचाई पर उत्पादित किया जाता है।
राज्य में पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के दारमा, व्यास, आदि क्षेत्रों में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की वित्तीय सहायता से वन विभाग सीबकथॉर्न सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा दे रहा है। लेकिन अभी तक प्रदेश में इसका उत्पादन काफी कम है जबकि हमारा पड़ोसी मुल्क चीन सीबकथॉर्न का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
सीबकथॉर्न का इस्तेमाल एलर्जी, खांसी, त्वचा व आंख के रोगों में किया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी2, बी3, विटामिन सी, ए, ई, के, अमीनो एसिड और प्रोटीन जैसे कई उपयोगी तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके फलों के साथ-साथ इसकी पत्तियों में भी औषधीय गुण पाए जाते हैं और उनका इस्तेमाल भी औषधीय उपयोग में लाया जाता है। इनका उपयोग गुर्दे की बीमारियों, कैंसर, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने आदि में किया जाता है।
अपने औषधीय गुण के चलते सीबकथॉर्न फल की बाजार में काफी डिमांड है। इसके फल से तैयार जूस काफी महंगे दामों में प्रति लीटर की दर से बाजार में उपलब्ध है। राज्य सरकार का कहना है कि इसकी खेती उच्च हिमालय क्षेत्रों के किसानों की आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। पर्वतीय जिलों में सीबकथॉर्न की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य योजना बनाई जा रही है। सरकार की मंशा चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी जिले के उच्च हिमालय क्षेत्रों में सीबकथॉर्न के उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके लिए योजना बना कर उसे अमल में लाने की तैयारी की जा रही है।
