नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का सफाई अभियान एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लंबे समय से की जा रही यमुना को साफ करने की कोशिशों के सामने एक नया रोड़ा आ गया है। दरअसल, एनजीटी के निर्देश पर आईआईटी दिल्ली की एक विशेषज्ञ टीम को दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स में लगे यूवी सिस्टम की जांच करनी थी, जिससे यह पता चल सके कि गंदे पानी में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया को कारगर तरीके से समाप्त किया जा रहा है या नहीं। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि जांच टीम को अब तक न तो जरूरी आंकड़े उपलब्ध हो पाए हैं, न ही प्लांट्स में प्रवेश का अनुमति पत्र मिल पाया है और न ही तकनीकी सहयोग उपलब्ध हो रहा है। मजबूरन आईआईटी की टीम ने एनजीटी के सम्मुख शिकायत दर्ज कराई है कि इन बुनियादी सुविधाओं के बिना जांच पूरी करना संभव नहीं हो पाएगा।

इस मामले को इसलिए भी गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता है क्योंकि यमुना पहले से ही अत्यधिक प्रदूषण, दुर्गंध और बैक्टीरिया की समस्या से बेहाल है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जांच में बरती जा लापरवाही और देरी, यमुना की सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। अगर समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए और खामियों को नहीं सुधारा, तो यमुना की स्थिति अति गंभीर की श्रेणी में पहुंच सकती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब स्वयं अदालत के आदेश पर जांच होनी है, तो फिर जांच करने वाली संस्था या टीम क्यों अपेक्षित सहयोग से वंचित है।

प्रथम दृष्ट्यता यमुना की सफाई की दिशा में यह रुकावट प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। यह मामला 2024 में एक मीडिया रिपोर्ट से सुर्खियों में आया, जिसमें स्पष्ट तौर पर इंगित किया गया था कि दिल्ली के 70 फीसदी से ज्यादा बैक्टीरिया ठीक से साफ नहीं हो पा रहे हैं, और इससे यमुना में बदबू और प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। एनजीटी ने खुद ही इस मामले का संज्ञान लिया और अगस्त 2025 में आईआईटी दिल्ली की सिविल इंजीनियरिंग विभाग की विशेषज्ञ टीम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। एनजीटी ने आईआईटी दिल्ली की सिविल इंजीनियरिंग विभाग की विशेषज्ञ टीम को निर्देश दिया था। टीम में शामिल विशेषज्ञों ने कहा है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए उन्हें एसटीपी का दौरा करना, पानी के सैंपल लेना और डाटा प्राप्त करना जरूरी है। लेकिन टीम को अब तक डाटा, प्लांट्स में प्रवेश और लॉजिस्टिक सहायता नहीं मिल सकी है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की जुलाई 2025 की रिपोर्ट और एसटीपी के इनलेट-आउटलेट डाटा भी अभी तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं। वांछित कार्य की प्रगति बाधित है जिससे यमुना की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

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