जम्मू – कश्मीर: सुरक्षाबलों ने सोमवार को किश्तवाड़ के सिंहपोरा में घने जंगलों के बीच बने आतंकवादियों के अड्डे को नेस्तनाबूद कर दिया। यह अड्डा हमास स्टाइल में भूमिगत बना हुआ था जिसमें निकासी की भी व्यवस्था थी। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर बने इस ठिकाने में गैस चूल्हा, सिलेंडर, बर्तन, महीने भर से ज्यादा का राशन और पानी के लिए प्लास्टिक का बड़ा ड्रम बरामद हुआ है। इतनी ऊंचाई तक आतंकियों के लिए यह सामान किसने और कब पहुंचाया यह सवाल सुरक्षा एजेंसियों के सामने मुंह बाए खड़ा है। आतंकियों के इस अड्डे का पता लगने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं।
बता दें कि रविवार को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ के बाद से ही सुरक्षाबल पूरे इलाके की सघन जांच में जुटे हैं। इस दौरान बल की नजर में यह हमास स्टाइल भूमिगत ठिकाना आ गया। इससे पूर्व अगस्त 2025 में भी जिले के जंगली इलाके में ऐसे ही एक ठिकाने का पता चला था, जिसे एक पहाड़ी पर करीब 35 फीट लंबी प्राकृतिक गुफा के अंदर बनाया गया था। इसमें 6 से 8 लोग रह सकते थे और इसमें भाग निकालने के लिए कई रास्ते बने थे। सिंहपोरा में मिले ठिकाने में भी 3 – 4 लोग रह सकते थे और इसके भी बचकर निकलने के कई रास्ते मौजूद थे। इस अड्डे का मुख्य प्रवेश द्वार झाड़ियों से ढक दिया गया था ताकि यह आसानी से किसी की नजर में न आ सके।
सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ वाली जगह और सिंहपोरा, बैगपुरा जैसे इलाकों में अक्सर संदिग्ध गतिविधियां देखी जाती हैं। रात्रि के समय घोड़े – खच्चर जंगलों की तरफ जाते दिखाई देते हैं। बिना किसी स्थानीय मदद के आतंकियों के लिए इतना सामान एकत्रित करना संभव नहीं है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर लोग पुलिस तथा सेना को सूचित भी करते हैं। इसके बावजूद इस तरह की लॉजिस्टिक मदद से इलाके में आतंकियों के मजबूत नेटवर्क का पता लगता है। बिना किसी सहायता के, कठिन स्थान पर इतनी मात्रा में सामान जुटा पाना आतंकियों के लिए संभव नहीं जान पड़ता। आतंकी इस तरह के कार्यों को पैसे के बल पर या गन प्वाइंट पर अंजाम देते आए हैं। वह इस तरह के ठिकानों को बेस कैंप की तरह इस्तेमाल करते हैं। किसी स्थान पर हमला करने के बाद वह इन ठिकाने में आकर पनाह ले लेते हैं। ऐसी परिस्थितियों में आतंकी ठिकाना खोज निकालना एक बड़ी कामयाबी है।
आतंकियों और उनके समर्थकों के खिलाफ विभिन्न एजेंसियों की कार्रवाई में तेजी आई है। ऑपरेशन महादेव के बाद आतंकी कश्मीर में घुसने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। इस वजह से वह किश्तवाड़ को बैस कैप के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। सिंहपोरा इलाका एक दुर्गम क्षेत्र है और यह आतंकियों की गतिविधि कुछ अधिक दिखाई देती है।
