राजस्थान: राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बूंदी के गुहाटा में निर्माणाधीन चंबल एक्वाडक्ट का निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राम जल सेतु लिंक परियोजना से पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को जल सुरक्षा मिलेगी और प्रदेश जल आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।
जल संसाधन मंत्री के अनुसार, पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों के लिए संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना/ राम जल सेतु लिंक परियोजना प्रदेश को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। जल संसाधन मंत्री द्वारा सोमवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण किया गया और करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर उन्होंने कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसी के साथ समीक्षा बैठक कर कार्यों को गुणवत्ता और तय समय-सीमा में समाप्त करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में परियोजना का कार्य मिशन मोड पर किया जा रहा है। चंबल नदी पर लगभग सवा दो किलोमीटर लंबे एक्वाडक्ट का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी लागत 2,300 करोड़ रुपए से अधिक है। परियोजना का शुभारंभ मई 2025 में किया गया था और इसे जून 2028 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह एक्वाडक्ट कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव को बूंदी जिले की इंद्रगढ़ तहसील के गुहाटा गांव से जोड़ेगा।
इस परियोजना के पूरा हो जाने पर कालीसिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज से पानी पंप हाउस के जरिए मेज नदी में छोड़ा जाएगा। जिसके पश्चात मेज बैराज से फीडर प्रणाली के माध्यम से गलवा बांध, फिर बीसलपुर और ईसरदा बांध तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके अतिरिक्त एक्वाडक्ट आमजन के लिए अतिरिक्त आवागमन मार्ग के रूप में भी उपयोगी में लाई जाएगी। निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री ने परियोजना से जुड़े अभियंताओं और श्रमिकों से बातचीत की। उन्होंने श्रम शक्ति की सराहना करते हुए सुरक्षा मानकों का आवश्यक रूप से पालना करने के निर्देश दिए।
जानकारी के मुताबिक, ईआरसीपी को वृहद स्वरूप देते हुए तैयार की गई संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना पर 90 हजार करोड़ रुपये के आसपास खर्च आएगा। प्रथम चरण में प्रदेश के 17 जिलों की करीब सवा तीन करोड़ आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो पाएगा। यह परियोजना जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसके माध्यम से राजस्थान जल आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा और राज्य के आर्थिक व सामाजिक विकास में तेजी आएगी।
