हिमाचल प्रदेश : केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान यानि आरडीजी को बहाल करने के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू ने शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इसे लेकर शुक्रवार को राज्य सचिवालय शिमला में बैठक आयोजित होगी। आरडीजी बंद किए जाने के मुद्दे पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने पहले गुरुवार को दोबारा से मंत्रिमंडल की बैठक भी बुलाई है। संसदीय कार्य मंत्री द्वारा सर्वदलीय बैठक को लेकर भाजपा प्रदेश को औपचारिक पत्र भेजा गया है। बता दें कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस सत्ता में है तो भाजपा विपक्षी दल है।

संसदीय कार्य मंत्री ने भाजपा प्रदेश को 10 फरवरी को लिखे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि 16वें वित्त आयोग और केंद्र सरकार की ओर से आरडीजी को बंद किए जाने के कारण प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। पत्र में कहा गया है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य हित में सामूहिक और एकजुट दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। पत्र में निवेदन किया गया है कि अपने सुझावों सहित बैठक में उपस्थित होकर आगे की रणनीति तय करने में सहयोग दें। राज्य सरकार का मानना है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी से राज्य के हित में साझा निर्णय लिया जाना अपेक्षित है।

सरकार ने इससे हिमाचल प्रदेश को आगामी पांच वर्षों में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। यह अनुदान विशेष श्रेणी राज्य के रूप में हिमाचल के लिए वित्तीय आधार माना जाता रहा है। इसके बंद होने से विकास योजनाओं समेत सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों व वित्तीय संतुलन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि 13 फरवरी को होने वाली सर्वदलीय बैठक को लेकर उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने के बाद ही कुछ कहने की स्थिति बन पाएगी। हालांकि, सीएम सुक्खू ने कहा कि रविवार को भी भाजपा विधायक दल को भी बैठक के लिए बुलाया गया था, इसमें जयराम ठाकुर को भी आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि राज्य में सरकार चाहे किसी की भी हो, हिमाचल का हित सर्वोपरि होना चाहिए। जयराम को उन पर दोषारोपण करने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर हिमाचल के जो अधिकार छीने गए हैं, उनकी बहाली की मांग करनी चाहिए।

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