हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति में सख्त प्रावधान लागू किए हैं। इसमें बिना लाइसेंस शराब परोसने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। धर्मशाला, शादी समारोह, बैंक्वेट हॉल, मैरिज पैलेस या अन्य किसी व्यावसायिक परिसर में बिना लाइसेंस शराब परोसने पर पहली बार 50 हजार, दूसरी बार 75 हजार और तीसरी बार एक लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। लगातार उल्लंघन करने की स्थिति में अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकृत लाइसेंसी द्वारा अनधिकृत रूप से शराब परोसने पर 20 हजार से शुरू होकर तीसरी बार 50 तक हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। चौथी बार दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

प्रदेश में वर्ष 2026-27 के लिए अधिसूचित आबकारी नीति के तहत प्रावधान किया गया है कि यदि कोई रिटेल ठेका निर्धारित न्यूनतम खुदरा मूल्य से ज्यादा कीमत वसूलते या कम दाम पर बिक्री करते पाया गया तो संबंधित ठेका एक दिन के लिए सील कर दिया जाएगा। दोबारा उल्लंघन पर सीलिंग दो दिन के लिए की जाएगी और यह कार्रवाई अन्य कानूनी दंड के अलावा की जाएगी। नई नीति में शराब के होलसेल लाइसेंस (एल-1 और एल-13) की फीस में 10 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि पहले यह फीस 40 लाख रुपये सालाना थी, जिसे बढ़ाकर अब 50 लाख रुपये कर दिया गया है।

होटलों और बार लाइसेंस शुल्क में भी श्रेणी के हिसाब से फीस में दस से 30 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। सरकार का तर्क है कि इससे राजस्व में इजाफा होगा और अवैध कारोबार पर अंकुश लगया जा सकेगा। यदि कोई निर्माता बिना परमिट या तय मात्रा से अधिक ईएनए या बोतलबंद शराब मंगवाता पाया गया तो पहली बार एक लाख, दूसरी बार दो लाख और तीसरी बार तीन लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और साथ ही संबंधित शराब और कंटेनर दोनों जब्त कर लिए जाएंगे।

नई नीति में व्यक्तिगत रूप से शराब ले जाने और रखने की सीमा भी तय की गई है। कोई व्यक्ति एक बार में 750 एमएल की छह बोतलें या 1000 एमएल की पांच बोतलें ही साथ ले जा सकता है। बीयर की 650 एमएल वाली 24 बोतलें या 5-5 लीटर के तीन कैन तक ले जाने की अनुमति प्रदान की गई है। पारिवारिक उपयोग के लिए भी निर्धारित सीमा तय की गई है। सामाजिक आयोजनों के लिए परमिट धारक 72 ब्लेंडेड स्पिरिट/देसी शराब और 78 बीयर तक ले जा सकेगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में अवैध शराब के तीन या अधिक मामले दर्ज हुए हैं, वहां स्थानीय निकाय की अनुमति के बिना भी शराब का ठेका खोला जा सकेगा। आबकारी आयुक्त को राजस्व हित के लिए नियमों में संशोधन का अधिकार दिया गया है।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *