पंजाब: पंजाब में तकरीबन साढ़े तीन साल से पुलिस की कमान संभाल रहे कार्यवाहक डीजीपी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। यूपीएससी द्वारापंजाब सरकार को स्थायी डीजीपी की व्यवस्था के लिए सीनियर अफसरों का पैनल भेजने के लिए कहा गया है।
इस संदर्भ में मुख्य सचिव को पत्र प्रेषित किया गया है, जिसमें गृह विभाग को आगामी कार्यवाही के लिए अग्रसित कर दिया गया है। गृह विभाग द्वारा डीजीपी कार्यालय को सीनियर अफसरों का पैनल बनाने के लिए कहा गया है। बता दें कि पंजाब में मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जुलाई में साल 1992 बैच के आईपीएस अफसर गौरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था। उस वक्त यूपीएससी को स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए कोई पैनल नहीं भेजा गया था।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 दिन के भीतर यह पैनल और प्रस्ताव यूपीएससी को भेजा जाना है। इस संबंध में सरकार ने बिल पेश कर कार्यकारी डीजीपी की नियुक्ति के लिए रास्ता निकाल लिया था। यही व्यवस्था अभी तक चली आ रही है। गौरव यादव पहले मुख्यमंत्री मान के विशेष प्रिंसिपल सेक्रेटरी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे। इससे पहले यादव 2016-17 के दौरान पंजाब पुलिस के खुफिया विभाग के मुखिया भी रह चुके थे। सीनियर आईपीएस वीके भावरा पंजाब के स्थायी डीजीपी थे मगर केंद्र में डेपुटेशन पर जाने के बाद पंजाब में गाैरव यादव को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था।
पंजाब में गाैरव यादव की बताैर कार्यकारी डीजीपी पद पर नियुक्ति के बाद कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिसके चलते उनके लिए चुनाैतियां बढ़ती चली गई। सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस, अमृतपाल सिंह केस, चाैकियों-थानों पर आतंकी हमले जैसे बड़े मामलों के साथ-साथ वर्तमान में बढ़ता गैंगस्टरवाद और नशा तस्करी के मामलों ने उनके समक्ष चुनाैतियों को और बढ़ा दिया। हालांकि सरकार के निर्देशों पर उनके कार्यकाल में ही नशा तस्करों के खिलाफ ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ और गैंगस्टरों के खिलाफ ‘ऑपरेशन प्रहार-गैंगस्टरों पर वार’ भी शुरू किया गए मगर प्रदेश में आप नेताओं की खुले आम हत्या के मामलों ने सियासी विरोधियों को डीजीपी पद की कार्यवाहक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने का एक बड़ा माैका दे दिया है।
वर्तमान में पंजाब पुलिस में 17 अफसर डीजीपी रैंक के हैं। स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए पंजाब सरकार द्वारा यूपीएससी को तीन सीनियर आईपीएस अफसरों का पैनल उनकी सीनियोरिटी, अनुभव व सर्विस रिकाॅर्ड के आधार पर भेजना है। सीनियर आईपीएस संजीव कालड़ा साल 1989 बैच के अधिकारी हैं मगर बताया जा रहा है कि वे इसी माह सेवानिवृत हो जाएंगे। पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए भी एक वर्ष का समय शेष रह गया है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है, कि उससे पहले ही पंजाब को स्थायी डीजीपी मिल जाएगा।
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व विधायक, पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष सहित अन्य कई नेता सूबे में कार्यकारी डीजीपी की व्यवस्था पर सरकार की घेराबंदी में जुटे हुए हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी राज्यों में कार्यकारी डीजीपी की प्रथा पर चिंता व्यक्त कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों टिप्पणी की थी कि यह प्रथा उचित नहीं है, जिन राज्यों में ऐसी व्यवस्था है, वहां यूपीएससी संबंधित राज्य सरकारों से स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल मंगवाया जाना चाहिए।
