उत्तराखंड: उत्तराखंड में होली के त्योहार से पूर्व ही जेल में बंद कैदियों ने वैज्ञानिकों से हर्बल रंग बनाने की विधि सीख ली थी। साथ ही होली के दिन कैदियों को स्पेशल व्यंजन परोसे जाएंगे और नाच-गाने के साथ जश्न भी मनाया जाएगा।

राजधानी देहरादून स्थित सुद्धोवाला जेल के कैदी स्वयं के बनाए हर्बल गुलाल से होली का उत्सव मनाएंगे। होली से पहले ही उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण दिलवा दिया गया था। साथ ही होली के अवसर पर को कैदियों को गुजिया, हलवा पूड़ी, सब्जी, और खीर समेत कई स्पेशल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

होली के त्योहार पर कैदियों को अपने घर की कमी महसूस न हो इसके लिए जेल प्रशासन की ओर से कई इंतजाम किए गए हैं। खाने के लिए स्पेशल व्यंजनों के साथ ही जश्न के लिए नाचने – गाने की भी व्यवस्था की गई है। जो कैदी नाचने और गाने के शौकीन हैं उनके लिए प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा और कैदियों को बेहतर प्रस्तुति के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा। पुरस्कार की राशि जेल में खोले गए उनके बैंक अकाउंट में जमा कर दी जाएगी।

बता दें कि वर्तमान में देहरादून की सुद्धोवाला जेल में करीब 900 कैदी हैं। जेल में सजा काट रहे कैदियों में कौशल विकसित करने के लिए वैसे तो कई तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं, लेकिन इस बार होली के त्योहार के मद्देनजर उन्हें हर्बल रंग बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। उन्हें अरारोट और अलग-अलग रंगों को मिलाकर हर्बल रंग बनाना सिखाया गया है। जेल के अंदर होली खेलने के लिए उत्साहित कैदियों ने भारी मात्रा में रंग तैयार कर रखा है।

होली पर्व के दौरान कैदी अपने घरों पर बातचीत कर अपने परिजनों का हाल-चाल भी जान सकेंगे। होली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए जेल प्रशासन की तरफ से उन्हें यह रियायत प्रदान की गई है। ऐसा देखा गया है कि आमतौर पर त्योहारों पर कैदी अपने परिवार की कमी ज्यादा महसूस करते हैं। उनकी मायूसी दूर करने के लिए जेल प्रशासन पूरा ध्यान रख रहा है। इसी वजह से होली के जश्न के दौरान जेल के आला अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहते हैं। कैदी और अधिकारी एक-दूसरे को रंग लगा कर होली का उत्सव मनाएंगे।

हाल ही में लोक भवन में संपन्न हुए वसंत उत्सव में भी सुद्धोवाला जेल के कैदियों द्वारा बनाए गए हर्बल रंगों की बिक्री की गई थी। इसके अलावा अन्य कई वस्तुएं भी बेची गई थीं। अधिकारियों के अनुसार, कैदियों ने वसंत उत्सव में स्टाल लगाकर एक लाख रुपए से अधिक की बिक्री की थी। इस दौरान उनके रंगों को खूब सराहना मिली थी।

डीआईजी जेल के अनुसार, इस बार कैदियों के बनाए गए हर्बल रंगों से होली का पर्व मनाया जाएगा और साथ ही होली पर कैदियों को अकेलापन महसूस न हो इसके लिए नाचने और गाने के कार्यक्रम का भी आयोजन किया जा रहा है।

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