गुजरात: गुजरात राज्य में सूरत के पांचवीं पास दीपक पटेल डेयरी क्षेत्र में ‘मिरेकल बॉय’ बन कर उभरे हैं। कृत्रिम गर्भाधान में 80 फीसदी गर्भधारण की सफलता दर के साथ देश में अव्वल आने वाले दीपक को सहकारिता मंत्री अमित शाह से सम्मान पा चुके हैं। दीपक की कुशलता और समर्पण से हजारों पशुपालकों की आय में बढ़ोत्तरी हुई है।
सूरत जिले की महुवा तहसील के वहेवल नाम के एक छोटे से गांव में रहने वाले 5वीं कक्षा पास 63 साल के दीपक पटेल कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन के तौर पर अपनी असाधारण कुशलता की वजह से पूरे देश में डेयरी उद्योग क्षेत्र में ‘मिरेकल बॉय’ के रूप में उभर रहे हैं। दीपक ने पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान यानि आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन-एआई के द्वारा 80 फीसदी गर्भधारण की सफलता दर हासिल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने भारत में इस क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी पशुधन विकास के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए दीपक को सम्मानित किया है।
उनकी इस विशिष्ट उपलब्धि के फलस्वरूप भारत के डेयरी उद्योग क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें ‘मिरेकल बॉय’ कह कर पुकारते हैं। दीपक पटेल साल 1999 से सूरत जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड यानि सुमुल डेयरी से जुड़े हुए हैं और कृत्रिम गर्भाधान के काम में लगे हुए हैं। उन्होंने पिछले दो दशकों से कृत्रिम गर्भाधान में 80 फीसदी गर्भधारण की सफलता दर को बनाए रखा है, जिसे एक असाधारण उपलब्धि माना जा सकता है। कृत्रिम गर्भाधान के काम से जुड़े तकनीशियनों को प्रेरणा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड एनडीडीबी ने दीपक पटेल के कार्य को दिखाने के लिए सफल बीजदान नाम से एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म का निर्माण भी किया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में कृत्रिम गर्भाधान की औसत सफलता दर 35 से 40 फीसदी है। वहीं, दीपकभाई की सफलता दर लगभग 80 फीसदी है। कृत्रिम गर्भाधान क्षेत्र में 80 फीसदी सफलता की यह दर राष्ट्रीय औसत के मुकाबले दोगुनी है। दीपक पटेल की इस असाधारण कुशलता के कारण सूरत जिले के कई क्षेत्रों में, विशेषकर महुवा तहसील में पशुओं की प्रजनन क्षमता, दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय में असाधारण वृद्धि हुई है।
दीपक अब तक 80 हजार से अधिक कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया संपन्न कर चुके हैं। सुमुल डेयरी के वेटरनरी विभाग के प्रमुख के अनुसार, सुमुल डेयरी ने अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत सूरत और तापी जिले में प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख कृत्रिम गर्भाधान किए हैं। सुमुल डेयरी की कृत्रिम गर्भाधान की सफलता दर तकरीबन 53 फीसदी रही है।
दीपक की विशेष दक्षता के कारण उनकी सफलता की दर लगभग 80 फीसदी है और उनकी इस सफलता का लाभ उनके क्षेत्र महुवा के पशुपालकों को मिलता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में न केवल दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ रही है, बल्कि पशुओं की दुग्ध उत्पादकता भी और जगहों से ज्यादा है।
