पंजाब : पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब पंजाब के होटल एवं रेस्टोरेंट उद्योग पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। कामर्शियल एलपीजी गैस की सप्लाई पिछले कई दिनों से बंद होने के चलते हालात इतने खराब हो चुके हैं कि होटलों के चूल्हे अब ठंडे पड़ने लगे हैं।

इस संकट के गहराने से छोटे कारोबारियों के सामने अस्तित्व का सवाल खड़ा हो गया है और कई जगहों पर होटलों पर ताले लगने लगे हैं। गैस संकट को लेकर वीरवार शाम होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ पंजाब की एक बैठक हुई, जिसमें उद्यमियों ने मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता वयक्त की। कारोबारियों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट व्यापार पूरी तरह से गैस पर निर्भर हैं और सप्लाई बाधित होने से उनका कामकाज ठप पड़ गया है।

बैठक में कहा गया कि प्रशासन कमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति सुचारु बनाए रखने में पूरी तरह असफल है। यदि इस समस्या का जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत आ सकती है।

एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि इस सेक्टर के लिए कामर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति सुचारू करने के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। कारोबारियों का कहना है कि होटल और रेस्टोरेंट पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं और इसकी सप्लाई बंद हो जाने से पूरा कामकाज ठप पड़ गया है। उद्यमियों ने बताया कि छोटे रेस्टोरेंट में रोजाना औसतन दो से तीन कामर्शियल एलपीजी सिलिंडर की खपत होती है, जबकि मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट में यह संख्या पांच से छह सिलिंडर तक पहुंच जाती है। बड़े रेस्टोरेंट्स में रोज दस या उससे अधिक सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। लेकिन पिछले कई दिनों से गैस की सप्लाई न होने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।

कारोबारियों के अनुसार, पहले जो सिंगल बर्नर डीजल भट्ठी आठ से दस हजार रुपये में मिल जाती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर तीस से पचास हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। ऐसे में छोटे कारोबारियों के लिए यह विकल्प भी लगभग असंभव सा ही हो गया है।

एसोसिएशन के प्रधान के मुताबिक, गैस संकट की वजह से होटल मालिकों को अपने मैन्यू कार्ड तक सीमित करने पड़ गए हैं। अब केवल चुनिंदा व्यंजन ही तैयार किए जा रहे हैं। कुछ छोटे होटल पहले ही बंद हो चुके हैं और यदि हालात जल्द नहीं सुधरये तो इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हो सकता है। उन्होंने सरकार पर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

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