जम्मू-कश्मीर : डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के फलस्वरूप जम्मू में ढुलाई लागत बढ़ रही है, जिससे मंडियों और खुदरा बाजार में सब्जियों, दूध और राशन के दाम बढ़ने की संभावना बन गई है। ग्राहक अब सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही सीमित खरीदारी कर रहे हैं और छोटे विक्रेता महंगे स्टॉक के चलते दबाव महसूस करने लगे हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध के चलते डीजल महंगा होते ही जम्मू में महंगाई के कदमों की आहट सुनाई पड़ने लगी है। फिलहाल दामों में बड़ा उछाल नहीं आया है लेकिन मंडियों में हलचल और बढ़ती ढुलाई लागत ने यह संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में रसोई से लेकर सफर तक के खर्च में इजाफा हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, डीजल महंगा होने का असर एक क्रम में बाजार तक पहुंचता है। पहले ढुलाई महंगी होती है, फिर मंडियों में दाम बढ़ने लगते हैं और उसके बाद खुदरा बाजार में महंगाई दिखाई देती है। मंडी व्यापारियों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में बाहरी राज्यों से आने वाले माल की ढुलाई 15 फीसदी तक महंगी हो गई है। ट्रकों का किराया भी तीन से चार हजार रुपए तक बढ़ गया है।
आढ़तियों का कहना है कि हरी सब्जियों के दाम में दस फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। आगे और दाम बढ़ने की आशंका बनी हुई है। डीजल के दाम बढ़ने से सब्जियों के साथ दूध और राशन पर खर्च बढ़ने की आशंका बन गई है। यदि आगे एलपीजी सिलिंडर महंगा हुआ तो रसोई का बजट और ज्यादा बिगड़ सकता है।
किराना दुकानदारों का कहना है कि थोक बाजार से आने वाले नए स्टॉक के महंगे दाम चुकाने पड़ सकते हैं। उनका अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में राशन के दाम पांच – सात फीसदी तक बढ़ सकते हैं। ग्राहक अब जरूरत के हिसाब से ही सीमित खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है। राशन कारोबारी को महंगा माल मिलने से उन्हें भी खुदरा दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं जिसका छोटे विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ रहा है।
पूर्व में भी जम्मू की निर्भरता दूसरे राज्यों पर दिख चुकी है। अर्थशास्त्री बताते हैं कि जम्मू में ज्यादातर जरूरी सामान बाहरी राज्यों से आता है और सप्लाई पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में डीजल की कीमत बढ़ते ही इसका असर यहां जल्दी और ज्यादा दिखाई देता है। विगत वर्षों में भी देखा गया है कि ईंधन महंगा होने के कुछ दिनों के भीतर ही जम्मू में सब्जी और ट्रांसपोर्ट के दाम बढ़ने लग जाते हैं। इस बार भी कुछ वैसा ही रुझान देखने को मिल सकता है।
ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में जम्मू-कश्मीर में महंगाई दर तकरीबन 1.86 फीसदी रही है, जो कई पड़ोसी राज्यों की अपेक्षा कम है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में महंगाई दर इससे ज्यादा दर्ज की गई है। इसका आशय यह है कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में महंगाई का स्तर अपेक्षाकृत नियंत्रण में है परंतु यहां बाहरी राज्यों पर अधिक निर्भरता होने से असर थोड़ी देर से दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ढुलाई लागत का दबाव बढ़ेगा, वैसे-वैसे पड़ोसी राज्यों की भांति ही जम्मू में भी महंगाई का असर तीव्रता से दिखाई देने लग सकता है।
