भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ देखती है और नितिन नवीन में उसे संभावना दिखी। विधायक के रूप में नितिन नवीन पटना पश्चिमी क्षेत्र की पहचान बन कर उभरे। उप चुनाव में जीते और फिर हमेशा बड़े अंतर से जीतते ही रहे। केंद्र में भी जब भाजपा की सरकार बन गई तो नितिन नवीन का राजनीतिक रूप बढ़ा। विजन की स्पष्टता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को समझते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। भाजयुमो अध्यक्ष के रूप में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा करना नितिन नवीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में पहचान बनी तो दूसरे राज्य की तरफ भी भाजपा ने उन्हें भेजा। सिक्किम – छत्तीसगढ़ में नितिन नवीन ने संगठन के लिए जो काम किया और जैसी सक्रियता दिखाई, उसी का परिणाम यह ताजा फैसला है। छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में वह भाजपा के लिए पुनर्वापसी का मार्ग प्रशस्त करने में सफल रहे।

जेपी नड्डा भी पहले कार्यकारी अध्यक्ष ही बनाए गए थे। बिहार में पले-बढ़े व्यक्ति और पहाड़ी का उस समय इस तरह उभरना चौंकाने वाला ही था। लेकिन, मोदी-शाह की भाजपा तो चौंकाने वाले फैसलों के लिए ही जानी जाती है। नितिन नवीन कायस्थ या बिहारी पहचान नहीं, बल्कि सांगठनिक कौशल के कारण कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचे हैं। ऐसा भी संभव है कि नितिन नवीन को आगे चलकर कार्यकारी की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष ही घोषित कर दिया जाए और भाजपा को विकल्प तलाशने की जरूरत न पड़े ।

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