उत्तर प्रदेश : नोएडा एयरपोर्ट देश का प्रथम एयरपोर्ट है जोकि पूर्ण रूप से ईको फ्रेंडली होगा। एयरपोर्ट परिसर के भीतर 133 हेक्टेयर भूमि में हरित क्षेत्र बनाया गया है जिससे एयरपोर्ट में आने वाले देशी और विदेशी नागरिकों को स्वच्छ वातावरण का अनोखा अनुभव प्राप्त हो सकेगा।

एयरपोर्ट को कुल 5428 हेक्टेयर में विकसित किए जाने की परियोजना है, जो चार चरण में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 1334 हेक्टेयर भूमि को अधिग्रहित किया गया था, जिसमें एयरपोर्ट प्रारंभ किया जा रहा है। एयरपोर्ट को आने वाले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। एनसीआर में बढ़ते वाहनों की तादाद और लगातार विकसित हो रही इंडस्ट्री के फलस्वरूप इस क्षेत्र में प्रदूषण दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।

एयरपोर्ट का निर्माण शुरू होने के समय निर्माण स्थल पर 600 के करीब पेड़ थे। प्राधिकरण ने प्रकृति का ध्यान रखते हुए इन पेड़ों को कटवाने की जगह इन्हें दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करवा दिया था। परिसर के अंदर विकसित किए गए हरित क्षेत्र में सभी पेड़ शिफ्ट किए गए थे।

दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में अंडर ग्राउंड वाटर लेवल तेजी से कम होता जा रहा है। अंडर ग्राउंड वाटर लेवल को रिचार्ज करने के लिए एयरपोर्ट परिसर के अंदर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी तैयार किए गए हैं। इसके साथ साथ यहां प्राकृतिक तालाब भी विकसित किए गए हैं जिससे बारिश के पानी को संचित करके उसका बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

उद्घाटन के पश्चात् एयरपोर्ट को संचालित करने के लिए बिजली की आवश्यकता होगी और इससे होने वाले कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के लिए पहले दिन से परिसर में रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाएगा। एयरपोर्ट के लिए बिजली की जरूरत को सौर और पवन ऊर्जा से तैयार किया जाएगी जिसके लिए परिसर में सोलर पैनल लगा दिए गए हैं। वहीं एयरपोर्ट के जरिए पवन चक्कियां भी स्थापित की गई हैं जिनका इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जा रहा है। शेष 50 प्रतिशत जरूरत रिन्यूएबल एनर्जी से पूर्ण की जाएगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में भविष्य में काम आ सकने वाली सारी जरूरतों का ध्यान रखा गया है। निर्माण के दौरान ही इसे प्रकृति से जोड़ने पर पूरा ध्यान दिया गया है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निर्बाध बिजली देने के अलावा उसकी चमक बढ़ाने और बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए विद्युत निगम से लेकर परिवहन निगम ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। साल 2027 तक एयरपोर्ट से उड़ाने बढ़ने पर 6 से बढ़ाकर 93 मेगावाट तक की बिजली आपूर्ति की जाएगी। साथ ही नोएडा-ग्रेनो व ग्रेनो वेस्ट के निवासियों को एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए परिवहन निगम द्वारा डबल डेकर बसों को एयरपोर्ट से कनेक्ट करने वाले रूटों पर चलाने पर मंथन किया जा रहा है।

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता के अनुसार, जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निर्बाध बिजली देने की प्लानिंग पूरी कर ली गई है। पिछले कुछ महीने से इस पर काम चल रहा है और वर्तमान में फिलहाल 6 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। एयरपोर्ट का उद्घाटन होते ही दबाव बढ़ जाएगा जिसके बाद अगले कुछ महीने के भीतर 20 मेगावाट (एमवीए) तक बिजली की आपूर्ति बढ़ा दी जाएगी। साथ ही साल 2027 के शुरू होते ही एयरपोर्ट में उड़ाने भी बढ़ चुकी होंगी ऐसे में उन्हें 93 मेगावाट तक की बिजली आपूर्ति करने का प्लान तैयार किया गया है।

परिवहन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक के मुताबिक, जिले में जल्द संचालित होने वाली डबल डेकर बसों को फिलहाल नोएडा ग्रेनो और ग्रेनो वेस्ट समेत अन्य इलाकों की कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर था, लेकिन अब एयरपोर्ट में बढ़ने वाले दबाव और नोएडा की जनता को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए शुरू होने वाली डबल डेकर एसी बसों को भी एयरपोर्ट के साथ जोड़ा जाएगा। इसके लिए रूट का निर्धारण करने के लिए विचार विमर्श जारी है। इसके अलावा नॉन एसी बसें भी अपने निर्धारित रूट के अलावा एयरपोर्ट के बेहद नजदीक से गुजरेंगी, ताकि आगरा, लखनऊ, मथुरा समेत अन्य इलाकों से आने वाले लोगों को भी सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध हो पाए।

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे और उद्घाटन के बाद वह एक जनसभा को संबोधित करेंगे।



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