नई दिल्ली: देश की राजधानी में गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरे जोश और उल्लास के साथ की जा रही हैं। इस राष्ट्रीय पर्व को यादगार बनाने के लिए जवान कड़ा रिहर्सल कर रहे हैं। दिल्ली में 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस की परेड की तैयारियों के अंतर्गत कर्तव्य पथ पर जवानों का अभ्यास मौसम की विपरीत परिस्थितियों में भी बदस्तूर जारी है। कड़ाके की ठंड और सुबह के घने कोहरे के बीच भी देशभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। शुक्रवार को भारतीय नौसेना के जवान अनुशासन, एकरूपता और अदम्य जज्बे के साथ परेड रिहर्सल करते नजर आए जोकि होने वाले समारोह की भव्यता और सशस्त्र बलों की तैयारियों का एक सशक्त संदेश है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानि एएसआई ने ऐतिहासिक लालकिला परिसर में ‘भारत पर्व’ को आयोजित किए जाने संबंधी स्वीकृति दे दी है। यह आयोजन 20 से 31 जनवरी 2026 तक ऑगस्ट क्रांति मैदान और ज्ञान पथ में आयोजित किया जाएगा।
एएसआई ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय के प्रस्ताव को सक्षम प्राधिकरण से मंजूरी मिल चुकी है और पूर्व की ही तरह, इस वर्ष भी आयोजन निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन होगा। कार्यक्रम की तैयारियों और संचालन के लिए 14 जनवरी से 4 फरवरी 2026 तक आयोजन स्थल आयोजकों के लिए उपलब्ध रहेगा।
इस बार दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर हिमाचल की झांकी देश-दुनिया के सामने भारत के वीर सपूतों और शौर्य की गाथा प्रस्तुत करेगी। इस झांकी का डिजाइन जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय शिमला के सहायक आचार्य अमन नेगी द्वारा तैयार किया है।
झांकी के पहले हिस्से में पारंपरिक हिमाचली काठकुणी वास्तुकला की छत है, जो भूकंपरोधी तकनीक और दृढ़ता को दर्शाती है। छत के ऊपर स्थापित हिमाचली टोपी झांकी की पहचान है। टोपी के शिखर पर चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं बनाई गई हैं, जो हिमाचल के वीर सपूतों को देश और प्रदेश के सबसे बड़े गौरव के रूप में प्रस्तुत करती हैं। झांकी में कुल चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र विजेताओं का प्रतिनिधित्व है। पहले हिस्से में शिल्प और मूर्तियों के माध्यम से उनके शौर्य को दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में सभी विजेताओं के चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही हिमालय पर तिरंगा फहराते सैनिकों की प्रतिमा भी है।
