उत्तराखंड: अंकिता भंडारी केस में धामी सरकार जल्द ही कोई फैसला लेने का विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवंगत अंकिता के माता-पिता को सबसे ज्यादा कष्ट झेलना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने अपनी बेटी खोई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुलाकात कर अपना पक्ष उनके सामने रखा है जिस पर सरकार जल्द ही फिसला लेगी। सरकार के स्तर पर लिए जाने वाले फैसले के लिए कानूनी पहलुओं पर विचार – विमर्श चल रहा है।

गुरुवार को राजधानी के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक के उपरांत  मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटी की हत्या का यह मामला संवेदनशील है। मैं पहले ही बता चुका हूं कि अंकिता के माता-पिता जिस भी जांच के लिए कहेंगे, सरकार उसके लिए तैयार है।

सीएम ने बताया कि उनसे मुलाकात के दौरान अंकिता के माता-पिता ने कुछ बातें साझा की हैं जिनपर सरकार जल्द ही फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि अंकिता की माैत पर राजनीति करने वालों को प्रदेश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। राजनीतिक लाभ पाने के लिए प्रदेश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने का प्रयास किया गया, साथ ही लोगों को भड़काने की चेष्टा भी की गई। ऐसे लोगों को जनता से माफी मांगनी चाहिए।

सीएम ने कहा कि कानूनी अपना काम करता रहेगा और कार्रवाई चलती रहेगी। दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद के घटनाक्रम पर प्रदेश में एसआईटी द्वारा भी मामले की जांच की जा रही है। अंकिता के माता-पिता ने जो बातें बताई हैं, उन पर कोई निर्णय लेने के लिए कानूनी राय ली जा रही है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

वहीं इस मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौर हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद गुरुवार को हरिद्वार लौट आए। राठौर ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वे न्याय के लिए पूरी तरह आश्वस्त हैं और सच्चाई सामने आने तक उनकी लड़ाई चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि अंकिता के नाम पर का कांग्रेस राजनीति चमका रही है।

पूर्व विधायक मीडिया से रूबरू हुए और बताया कि मामले में पूरी तरह न्याय नहीं मिल जाने तक वह भगवा वस्त्र धारण नहीं करेंगे। राठौर ने इसे अपनी निजी आस्था और संकल्प बताया। अंकिता भंडारी प्रकरण में राठौर ने कहा कि समाज और प्रदेश का माहौल जानबूझकर बिगाड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उर्मिला की वजह से स्थिति बिगड़ती गई और कांग्रेस ने अंकिता के नाम पर राजनीति करते हुए जनभावनाओं से खिलवाड़ किया।

राठौर ने दावा किया कि सोची-समझी साजिश बनकर उनके साथियों को भी रिपोर्ट में घसीटने का प्रयत्न किया गया। राठौर ने यह भी कहा कि रविदास पीठ की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि उन्होंने न तो किसी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और न ही किसी को अपमानित किया। राठौड़ ने सरकार के किसी भी फैसले को स्वीकार्य बताया।

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