नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की सड़कों पर पहली बार 7 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने तैंतीस सौ से अधिक अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का प्रस्ताव केंद्र सरकार की एजेंसी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड को अग्रेषित किया है। भेजे गए प्रस्ताव में बसों के आकार के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों का निर्धारण किया गया है, जिससे संकरी सड़कों से लेकर मुख्य मार्गों तक बस सेवा की कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सके।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रस्ताव हाल ही में सीएम रेखा गुप्ता और केंद्र सरकार की एजेंसी के बीच हुई बैठक के बाद तैयार किया गया है। परिवहन विभाग ने मौजूदा बस संचालन और रूट संरचना की समीक्षा करने के उपरांत केंद्र सरकार से अतिरिक्त बसों की आवश्यकता जताई है। इसमें पहली बार 7 मीटर की ‘मिनी इलेक्ट्रिक बसों’ को शामिल किया है, जिन्हें घनी आबादी वाले इलाकों, तंग गलियों।और मेट्रो स्टेशनों के आस – पास फीडर सेवा के रूप में संचालित किए जाने की योजना है।
प्रस्ताव के मुताबिक दिल्ली के लिए जो विभिन्न आकर और श्रेणी की बसें खरीदी जाएंगी वह सभी बसें वातानुकूलित और लो-फ्लोर होंगी। 7 मीटर की बसों का संचालन उन इलाकों में किया जाएगा जहां बड़े आकार की बसों को चलाना व्यावहारिक नहीं है। 9 मीटर की बसें फीडर रूट और कॉलोनियों को जोड़ने का कार्य करेंगी, जबकि 12 मीटर की बसें मुख्य मार्ग और अधिक भीड़ – भाड़ वाले कॉरिडोर पर तैनात की जाएंगी। दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार और भारी उद्योग मंत्रालय से अनुरोध किया है कि बसों की यह अतिरिक्त मांग पहले से स्वीकृत बसों के कोटे से अलग रखते हुए सब्सिडी मॉडल में शामिल की जाए।
सरकार का कहना है कि यदि सब्सिडी प्रक्रिया में किसी वजह से देरी होती है, तो बसों की खरीद में रुकावट न आने पाए इसके लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा। परिवहन विभाग का मानना है कि नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से अभी जहां परिवहन के सीमित विकल्प उपलब्ध हैं, उन इलाकों तक भी सार्वजनिक परिवहन पहुंच जाएगा। लो-फ्लोर बसों से महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए बस में चढ़ना-उतरना आसान रहेगा। बता दें कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए देशभर में वित्तीय सहायता और चार्जिंग ढांचे का विस्तार किया जा रहा है।
