मध्य प्रदेश: हजारों श्रद्धालुओं ने शिवभक्ति की परंपरा को संजोए मध्य प्रदेश की माहिष्मती नगरी महेश्वर में रविवार को भगवान महामृत्युंजय शिव की भव्य रथयात्रा निकाली। फूलों की बारिश के बीच बजते ढोल-नगाड़ों और नर्मदा नदी के तट पर हुई महाआरती ने पूरे नगर को शिव की भक्ति में रंग दिया।

प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति से पूर्व रविवार को आयोजित की जाने वाली यह महामृत्युंजय शिव रथयात्रा, उज्जैन की महाकाल सवारी की तरह ही महेश्वर वासियों के लिए अति विशेष है। इस यात्रा में वर्षों से  श्रद्धालुओं की सहभागिता लगातार बढ़ रही है जिससे यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ – साथ सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक चेतना की मिसाल बन कर उभर रहा है। तपोभूमि के नाम से प्रसिद्ध और शिवभक्ति की अमिट परंपरा को समेटे माहिष्मती नगरी महेश्वर में निकाली गई रथयात्रा से समूचा नगर को शिवमय हो गया।

भजनों की मधुर ध्वनि, भोले बाबा के जयघोष, ढोल-नगाड़ों की गूंज के मध्य हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूबकर भगवान महामृत्युंजय के रथ को  खींचते हुए आगे बढ़ते रहे। जन-जन की सहभागिता से सजी रथयात्रा का महालक्ष्मी नगर स्थित स्वाध्याय भवन से शुभारंभ किया गया। महामृत्युंजय रथयात्रा जैसे-जैसे नगर भ्रमण पर आगे बढ़ती गई उसके साथ ही श्रद्धालुओं का कारवां भी उसके साथ आगे बढ़ता चला गया। सुगंधित पुष्पों से सजे रथ में विराजमान भगवान महामृत्युंजय की एक झलक मात्र पाने के लिए सड़क के दोनों तरफ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्रित हो गई। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और धर्म ध्वजाओं के बीच निकाली गई इस 18वीं रथयात्रा ने सनातन संस्कृति की मिसाल पेश की।

इस रथयात्रा का नगर भर में भव्य स्वागत किया गया। विभिन्न स्थानों पर मंच सजाकर सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर भगवान महामृत्युंजय का अभिनंदन किया। महालक्ष्मी नगर से लेकर नर्मदा तट तक स्वागत का सिलसिला लगातार चलता रहा। श्रद्धालुओं की ओर से की गई फूलों की बारिश से सारा मार्ग फूलों से आच्छादित हो गया। नगर भ्रमण के पश्चात गोधूलि बेला में महामृत्युंजय रथयात्रा नर्मदा नदी के पावन तट पर स्थित नाव घाट पहुंची। यहां विशेष रूप से सजाए गए घाट पर 5100 दीप-बातियों और घंटे-घड़ियालों के साथ भव्य महाआरती संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और मां नर्मदा की आरती उतारी।

भगवान शिव की इस रथयात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी सम्मिलित हुए। व्यापारिक संस्थानों और समाजसेवियों ने सेवाभाव से श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क खाद्य सामग्री के स्टॉल लगाकर आयोजन में अपनी प्रतिभागिता निभाई।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *