उत्तराखंड: मकर संक्रांति के पावन स्नान पर कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचे। पंडित पुरोहितों के अनुसार, इस साल संक्रांति और एकादशी का शुभ फलदायी संयोग बन रहा है और इस विशेष मुहूर्त में स्नान करना अति उत्तम माना जा रहा है। सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में आना और एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। हरिद्वार के अतिरिक्त उत्तराखंड के बागेश्वर और हल्द्वानी में भी गंगा स्नान और उत्तरायणी पर्व को लेकर श्रद्धालुओं की सुबह से भारी भीड़ जुट रही है।

हरिद्वार में गंगा स्नान की सुरक्षा व्यवस्था हेतु जिला पुलिस के अलावा पीएसी और दूसरे जनपदों से आए अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है और शहर में भारी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है है। सर्दी के चलते श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हरकी पैड़ी पर एम्बुलेंस और मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

माघ मकर संक्रांति स्नान पर्व का शुभारंभ घने कोहरे और प्रचंड ठंड के बीच हुआ परंतु फिर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे। भीषण ठंड भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सकी। तड़के सवेरे से ही लोग घाटों पर स्नान दान आदि के कार्यों में संलिप्त नजर आए। ढोल दमाऊं की थाप के बीच देव डोलियों को हरिद्वार लाकर पवित्र गंगा नदी में स्नान कराया गया।

विद्वानों के अनुसार, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य देना और दान करना विशेष फलदायी माना गया है। ऐसे में इस वर्ष भी सुबह स्नान करने के पश्चात् भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष फलदायी माना जा रहा है। बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है जिससे यह दिन और अधिक शुभ माना जा रहा है। संयोग से इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी भी पड़ रही है।

ज्योतिषाचार्यों की मानें तो यह संयोग करीब 23 साल बाद बन रहा है, जब संक्रांति और एकादशी एक ही दिन मनाई जा रही हैं। ज्योतिष के अनुसार यह संयोग बहुत पुण्यकारी है और इस दिन किया गया स्नान, दान और पूजा अनंत गुना शुभ फल देने वाला माना जाता है। मकर संक्रांति पर स्नान के बाद तिल और गुड़ का दान करना शुभ माना जाता है। इस अवसर पर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने के पश्चात् गरीबों को कंबल, वस्त्र या अनाज दान करने की परंपरा है।

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