उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए जी जान से प्रयास कर रही है। भाजपा ड्राइंग रूम बैठकों के जरिये अपने पक्ष में माहौल बनाएगी। आगामी अगस्त माह में पार्टी ऐसी 10 हजार बैठकों के जरिये 60 हजार चुनिंदा कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेगी। ऐसा करने का मकसद गुटबाजी पर नकेल कसने और फीडबैक हासिल करने की योजना पर कार्य करना है।
इस अभियान के तहत भाजपा प्रदेश अध्यक्ष इसी दौरान राज्य के पूर्ण 75 जिलों का दौरा करेंगे। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य में उनकी सक्रियता बढ़ाई जाएगी इसलिए उन्हें अगस्त में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद के दायित्व से मुक्त किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।
पार्टी सूत्र के अनुसार अगले वर्ष यानि फरवरी-मार्च 2027 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय नेतृत्व की बड़े स्तर पर ऐसी बैठकों को आयोजित किए जाने की योजना है। केंद्रीय नेतृत्व का लक्ष्य है कि इन बैठकों के जरिये पूर्व सांसदों, विधायकों, मंत्रियों, पदाधिकारियों और पुराने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करने के साथ – साथ जमीनी हकीकत को भी समझा जाए।
बैठकों में मिलने वाले फीडबैक के आधार पर ही पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तैयार करेगी। फीडबैक ही टिकट हासिल करने का पैमाना भी बन सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष इन बैठकों के जरिये संगठन की वास्तविक स्थिति की भी समीक्षा करेंगे। वह यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि विधायकों के प्रति क्षेत्र विशेष में माहौल कैसा है। इसके अलावा इन्हीं बैठकों के जरिये आगामी चुनाव के मद्देनजर बूथ, ब्लॉक, विधानसभा और लोकसभा स्तर पर चुनावी तैयारियों का जायजा भी लिया जाएगा। सीट वार राजनीतिक स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। इस संपूर्ण कवायद का मकसद गुटबाजी पर लगाम लगाते हुए जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना है।
ड्राइंग रूम बैठकों से प्राप्त हुई फीडबैक के जरिये ही पार्टी सीट और क्षेत्रवार चुनावी रणनीति को अमली जामा पहनाएगी। इनके जरिये क्षेत्र विशेष से जुड़े मुद्दों और उन मुद्दों पर पार्टी की तात्कालिक स्थिति का आकलन भी किया जाएगा। पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को राज्य और केंद्र सरकार की उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार का मंत्र दिया जाएगा।
यह तयमाना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ ही मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे। किसी तरह का असमंजस पैदा न हो, इसके लिए पार्टी पहले ही यह घोषणा कर देगी। इसके अतिरिक्त चुनाव में योगी सरकार में कानून व्यवस्था में सुधार ही सबसे बड़ा मुद्दा होगा।
सूत्र से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्तमान में पूरे देश में सबसे बड़ा वोट बैंक कानून व्यवस्था है। इस मुद्दे पर योगी सरकार की धारणा सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी बेहद सशक्त है।
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वर्तमान गोंडा दौरा केवल प्रशासनिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे आगामी वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मंच, भाषण की शैली और विषय चयन में राजनीतिक संदेश स्पष्ट रूप से झलकता नजर आया।
विदित हो कि गोंडा जिले की सातों विधानसभा सीटों पर वर्तमान समय में भाजपा का कब्जा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक खींचतान और आंतरिक प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री के संदेश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने यह संकेत देने का प्रयास किया कि राजनीतिक एकता और संगठनात्मक अनुशासन विकास कार्यों की गति और परिणामों के लिए बेहद आवश्यक है। साथ ही यह भी संदेश भी सामने आया कि जनसमर्थन का आधार केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि विकास और जनकल्याणकारी कार्यों को संपादित करना है।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने गोंडा और अयोध्या के ऐतिहासिक तथा सामाजिक संबंधों को विशेष रूप से रेखांकित किया। राम मंदिर आंदोलन के दौर का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह संकेत दिया कि अयोध्या आंदोलन के चरम समय में इस पूरे क्षेत्र ने उस समय सक्रिय भूमिका निभाई थी। अयोध्या से बेहद नजदीक होने के कारण गोंडा की भौगोलिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान को भी उन्होंने उजागर किया।
