हिमाचल प्रदेश/ पंजाब : हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बेंगलुरु से लौटने के पश्चात इस संबंध में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर विचार विमर्श किया।

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल में जल्दी ही फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री के खाली चल रहे पद को भी जल्द ही भर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु से वापसी करने के बाद इस संबंध में कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मंत्रणा की। सीएम सुक्खू ने कांग्रेस संगठन और सरकार के कामकाज सहित कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और विकासात्मक मुद्दों पर उनसे चर्चा की।

वीरवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से दिल्ली में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष को प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं, चल रहे विकास कार्यों और संगठनात्मक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

बैठक के दौरान प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर मंत्रियों के साथ हुई चर्चाओं और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में पंचायत चुनाव को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थित प्रतिनिधि पंचायत चुनाव में विजयी हुए हैं, जो संगठन की जमीनी मजबूती को इंगित करता है।

इस दौरान सीएम ने अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने अभी से संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियां शुरू करने पर बल दिया, जिससे पार्टी आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सके। राजनीतिक दृष्टि से इस मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सीमाई क्षेत्रों में कथित खालसा टैक्स लिए जाने को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से दूरभाष पर चर्चा की। सीएम सुक्खू ने पंजाब सरकार से इस विषय में उचित कार्रवाई करने को कहा है।

उधर पंजाब में आठ महीने पश्चात विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। दोबारा सत्ता पर काबिज होने के लिए कांग्रेस इस बार गंभीर है और अपनी जमीन तलाश रही है जिसको लेकर मंथन किया जा रहा है।

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान बहुमत हासिल कर सत्ता पर काबिज कैसा हुआ जाए इस पर हाईकमान ने चिंतन प्रारंभ कर दिया है। पांच दिन के भीतर नई दिल्ली में हुईं दो हाई लेवल मीटिंग के दौरान इसी संदर्भ में कांग्रेसी नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल, पंजाब के प्रभारी भूपेश बघेल समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने रणनीतिक चर्चा की। शीर्ष नेताओं द्वारा पंजाब में कौन सी सीटें मजबूत हैं, कहां कड़े मुकाबले की संभावना है और कहां पार्टी कमजोर है, इस पर मंथन किया गया।

विदित हो कि सूबे में आठ माह उपरांत विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ – साथ ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी भी काफी गंभीर है। इसीलिए पार्टी ने सीट-टू-सीट रणनीति पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया गया है।

इसी कड़ी में पार्टी ने पंजाब में दो अहम सर्वे करवाए हैं। एक राहुल गांधी के निर्देशों पर एआईसीसी ने करवाया है जबकि दूसरा पीपीसीसी द्वारा करवाया गया है। सीट-टू-सीट किया गया सर्वे पंजाब में मतदाताओं के बीच पार्टी की स्थिति, नेताओं की लोकप्रियता, पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व और सूबे के ज्वलंत चुनावी मुद्दों पर आधारित है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हाईकमान और पंजाब कांग्रेस द्वारा करवाए गए सर्वे के दौरान कुछ बिंदुओं पर थोड़ा अंतर सामने आया है। एआईसीसी के सर्वे के मुताबिक पंजाब में सरकार बनाने के लिए कड़ी चुनौती पेश आ सकती है। वहीं पीपीसीसी के सर्वे में 64 से 68 सीटों के साथ आसानी से सरकार बन रही है। बता दें कि सत्ता में आने के लिए 117 में से 59 सीटों की आवश्यकता है।

इस फर्क को देखते हुए राहुल गांधी, खरगे और बघेल ने दोनों सर्वे एजेंसियों को आमने-सामने बैठाकर विस्तार से चर्चा की। कांग्रेस के सर्वे के दौरान पंजाब के ज्वलंत सियासी मुद्दों में शुमार गैंगस्टरवाद, बिगड़ी कानून व्यवस्था, नशा-हथियार तस्करी, पंथक संगठनों और सरकार के बीच टकराव तथा किसानों का संघर्ष बड़े मुद्दों के रूप में सामने आए हैं।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मालवा क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत लचर रहा था। क्षेत्र की 69 में से कांग्रेस मात्र दो सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। सर्वे में इस क्षेत्र पर खास फोकस करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से तकरीबन 20 हेविवेट नेता कांग्रेस जॉइन करना चाहते हैं। इनको कब शामिल किया जा सकता है और इनके शामिल होने के पश्चात संबंधित क्षेत्र में किसी प्रकार की गुटबाजी व विवाद उत्पन्न न होने पाए, इस पर भी विचार विमर्श किया गया।

सर्वे में जो विधानसभा सीटें कमजोर नजर आ रही हैं वहां की जिम्मेदारी किस मजबूत नेता को दी जाने पर भी शीर्ष नेताओं के बीच मंत्रणा हुई। कुछ सेलिब्रेटी चेहरों को भी सामने लाने पर विचार किया गया।

पंजाब का नेतृत्व बदलने पर हुए सर्वे में भी आईसीसी और पीपीसीसी के अनुमान में फर्क सामने आया है। हाईकमान का सर्वे कहता है कि सूबे में पार्टी नेतृत्व बदलने की मांग जोर पकड़ रही है परंतु इस मसले पर कई आला नेताओं में मतभेद है।

उधर पीपीसीसी के सर्वे के अनुसार 2027 विधानसभा चुनाव मौजूदा अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और प्रभारी भूपेश बघेल के नेतृत्व में ही लड़ा जाए परंतु मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष के साथ एक दलित नेता को बतौर कार्यकारी प्रधान साथ में लगाया जाए।

एआईसीसी की सर्वे टीम ने नेतृत्व परिवर्तन के दौरान कुछ नेताओं के नाम भी सुझाए हैं। फिलहाल सभी परिस्थितियों पर नजर रखते हुए पार्टी का गहन मंथन का दौर जारी है। प्रदेशाध्यक्ष बदला जाएगा या नहीं और यदि बदला जाएगा तो जातिगत व सामाजिक समीकरण क्या होंगे, यह हाईकमान ने तय करना है।

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