हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज में पुलिस ने एक चीनी नागरिक को हिरासत में लिया है। ये नागरिक बिना भारतीय वैध वीजा यहां रह रहा था। गिरफ्तार आरोपी चीन की पुलिस में अपनी सेवाएं दे चुका है। आरोपी के खिलाफ बिना वैध भारतीय वीजा के भारत में ठहरने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं उसकी गतिविधियां जासूसी से जुड़ी हुई तो नहीं हैं। जांच के दौरान उसके बैंक खाते में लगभग चार लाख चीनी युआन की धनराशि की जानकारी सामने आई है। उसके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। वह करीब पांच माह से मैक्लोडगंज के पास एक गांव में किराये के मकान में रह रहा था।
कांगड़ा पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सुरक्षा शाखा को सर्वप्रथम इस विदेशी नागरिक की संदिग्ध मौजूदगी की जानकारी मिली थी। जिसके बाद उसे सुरक्षा शाखा कार्यालय लेकर आया गया। आरोपी केवल चीनी भाषा में बातचीत कर रहा था और प्रारंभिक तौर पर उसके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिल सके हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी हिंदी या अंग्रेजी में बातचीत नहीं कर पाया। बाद में उसने अपना पासपोर्ट पुलिस की दिखाया। पासपोर्ट में उसका नाम लौ वेननियन और जन्म तिथि 10 मई 1965 दर्ज है। उसका जन्म स्थान सिचुआन और पासपोर्ट युन्नान स्थान से जारी किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी लगभग 130 दिन कांगड़ा के मैक्लोडगंज क्षेत्र में बिना किसी वैध भारतीय वीजा के रह रहा है। यह विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला में आईबी सहित कई केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालय हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे चीनी नागरिक का किसी केंद्रीय एजेंसी के संज्ञान में न आना सवाल खड़े करता है। हालांकि, हिमाचल पुलिस की सुरक्षा शाखा ने समय रहते कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया गया। बता दें कि मैक्लोडगंज में दलाई लामा का निवास और निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय होने के चलते यहां प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने यहां विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के कार्यालय स्थापित किए हुए हैं।
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु और 14वें दलाई लामा को पूर्व में चीन की तरफ से कई बार धमकियां मिल चुकी हैं। पिछले वर्ष खुफिया इनपुट के आधार पर उनकी सुरक्षा को खतरा बताया गया था। भारत सरकार ने उन्हें देशभर में जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की हुई है। वर्तमान में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ के कमांडो संभाल रहे हैं। 15वें दलाई लामा की घोषणा को लेकर चीन लगातार अपनी दावेदारी पेश करता रहा है, जबकि गादेन फोडरंग ट्रस्ट और तिब्बती धर्मगुरुओं ने साफ कहा है, कि वे इस प्रक्रिया में चीनी सरकार के किसी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करते।
