नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के उच्च न्यायालय में सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर सर्वोच्च न्यायालय किए जाने संबंधी याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट स्टेशन का हिंदी नाम देवनागरी में सर्वोच्च न्यायालय होना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अन्य स्टेशनों जैसे सेंट्रल सेक्रेटेरिएट का हिंदी नाम केंद्रीय सचिवालय लिखा गया है। उन्होंने आधिकारिक भाषा कानून का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के दफ्तरों में साइनेज और नेम प्लेट अंग्रेजी और हिंदी, दोनों भाषा में होने चाहिए और हिंदी देवनागरी लिपि में होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की बेंच के सामने डीएमआरसी के वकील ने तर्क दिया कि केवल स्टेशन पर लगे बोर्ड ही नहीं, बल्कि रूट मैप, मोबाइल ऐप और अन्य सूचनात्मक सामग्री में भी बदलाव की आवश्यकता पड़ेगी जिससे सरकारी खजाने को अतिरिक्त वित्तीय बोझ वहन करना पड़ेगा।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानि डीएमआरसी ने हाईकोर्ट को बताया  कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के हिंदी साइनेज को सर्वोच्च न्यायालय में परिवर्तित करना आसान नहीं है। इसमें करीब 40 से 45 लाख रुपये तक का व्यय आ सकता है। मुख्य न्यायाधीश के समक्ष डीएमआरसी के वकील ने बताया कि स्टेशन पर लगे बोर्ड के अतिरिक्त रूट मैप, मोबाइल ऐप और अन्य सूचनात्मक सामग्री में भी बदलाव करना पड़ेगा। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

वकील ने यह भी कहा कि अगर एक स्टेशन का नाम बदल दिया जाता है, तो अन्य स्टेशनों के लिए भी इसी तरह की मांगें आ सकती हैं। बता दें कि मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की और याचिकाएं आने की संभावना इस मामले का विरोध करने का पर्याप्त आधार नहीं मानी जा सकती।

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