नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से खाड़ी देशों को चावल, पेपर और विभिन्न कृषि उत्पाद बड़ी तादाद में सप्लाई किए जाते हैं। इसके अलावा गल्फ देशों में पैक्ड फूड की भी खासी डिमांड है। मौजूदा हालात में इन वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई है।यदि यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रही तो नए ऑर्डर मिलने में भी दिक्कतें आ सकती हैं। 

खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर राजधानी के बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। दिल्ली के थोक और निर्यात कारोबार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार, राजधानी से खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों के लिए बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है, लेकिन मौजूदा हालात के चलते न सिर्फ माल की आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि आयातित वस्तुएं भी महंगी हो गई हैं। व्यापारियों के मुताबिक़, खाड़ी देशों से आने वाले सामान की कीमतें अचानक बढ़ गई हैं। वहीं, परिवहन मार्ग के प्रभावित होने से शिपमेंट में भी विलंब हो रहा है, जिसका सीधा असर लागत पर पड़ रहा है। इसका असर आने वाले समय में कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को उठाना पड़ सकता है।

राजधानी के व्यापारियों ने बताया कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से खाड़ी देशों को चावल, पेपर और विभिन्न कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में भेजे जाते हैं। इसके अलावा गल्फ देशों में पैक्ड फूड की भी काफी मांग है। मौजूदा हालात में इन वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो नए ऑर्डर मिलने में भी परेशानी हो सकती है। कई विदेशी खरीदार पहले ही सतर्क हो गए हैं और उन्होंने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश शुरू कर दी है। इसका नुकसान भारतीय व्यापारियों को उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर, दुबई और अन्य खाड़ी देशों से आने वाले कुछ विशेष उत्पादों की कीमतों में इजाफा हो गया है। परिवहन लागत बढ़ने और डिलीवरी में देरी के कारण थोक बाजार में दरें बढ़ रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो खुदरा बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है।

खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण व्यापारियों का माल रास्ते में ही अटका हुआ है। उन्होंने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में जो जहाज 15 – 20 दिनों में गंतव्य तक पहुंच जाते थे, उन्हें पहुंचने में अब 40 दिन तक का समय लग सकता है। यूरोपीय देशों के लिए जो स्विस कैनाल के रास्ते वैसल भेजे जाते हैं, वे अब समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। समुद्री मार्गों पर बढ़ी सुरक्षा जांच, वैकल्पिक रूट और बीमा लागत में वृद्धि से समय और खर्च दोनों में बढ़ोत्तरी हुई है जिससे निर्यातकों की कार्ययोजना प्रभावित हो रही है। कई शिपमेंट पहले ही रवाना हो चुके थे, लेकिन युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में व्यवधान आने से उन्हें बीच रास्ते में रुकना और रूट बदलना पड़ा। इससे डिलीवरी की समयसीमा आगे खिसक गई है। माल समय पर न पहुंचने से विदेशी खरीदारों के साथ किए गए अनुबंधों पर भी असर पड़ सकता है। कई विदेशी खरीदार पहले ही सतर्क हो गए हैं और डिलीवरी का समय पूछ रहे हैं।यदि देरी ज्यादा हुई तो वह दूसरे देशों से माल खरीद सकते हैं जिससे भारतीय कारोबारियों को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।

फेडरेशन ऑफ ओखला इंडस्ट्रियल एरिया के वित्त सचिव ने बताया कि दिल्ली का एक बड़ा हिस्सा निर्यात आधारित व्यापार पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे तौर पर स्थानीय बाजारों पर पड़ता है। कारोबारियों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैकल्पिक लॉजिस्टिक व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि निर्यात प्रभावित न होने पाए। साथ ही बीमा और परिवहन लागत में राहत देने की मांग भी की गई है। फिलहाल, व्यापारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अनुमान जताया जा रहा है कि जैसे ही युद्ध की स्थिति में सुधार होगा, बाजार भी धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा। लेकिन तब तक देश और राजधानी के व्यापारियों को बढ़ी हुई लागत और अनिश्चितता के दौर से दो – चार होना पड़ेगा।

फिलहाल महंगाई का असर मुख्य रूप से थोक बाजार तक सीमित है, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो खुदरा बाजार की कीमतें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर आम ग्राहकों की रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ेगा और उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

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