उत्तराखंड : प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अभी सिर्फ चारधाम में गैर सनातनी प्रवेश पर रोक लगा दी गई है लेकिन यह आदेश भारत के हर तीर्थ क्षेत्र में लागू किया जाना चाहिए। जब मक्का मदीना में हिंदू नहीं जा ये तो अयोध्या, मथुरा तथा अन्य तीर्थ स्थलों पर गैर हिंदू के प्रवेश पर रोक क्यों नहीं लगाई जा सकती।
आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि अगर आज देश में वक्फ बोर्ड है तो सनातन बोर्ड भी होना चाहिए। सनातन बोर्ड बनने से सनातन का उत्थान होगा। गुरुकुलम बनेंगे तो उनसे सनातनियों को रोजगार भी उपलब्ध ही सकेगा।
उन्होंने कहा कि आज कल तीर्थ क्षेत्रों में चोरी सहित कई आपराधिक घटनाएं गठित हो रही हैं। अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा की बात करना कोई अधर्म नहीं है। हम हिंदू-मुस्लिम की बात नहीं सिर्फ अपने तीर्थ क्षेत्रों को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। हमारे मंदिर सुरक्षित रहें इसकी मांग हर युवा को करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मंदिरों का पैसा सरकार नहीं ले जा सकती, इसके लिए बोर्ड गठन कर उसका पैसा वहां जाना चाहिए ताकि सनातन का उत्थान हो सके। देश में आज बड़ी संख्या में मदरसे तो हैं लेकिन गुरुकुलम नहीं हैं।
आज विज्ञान है तो सनातन का ज्ञान भी होना चाहिए और सनातनी हो तो सनातनी बनो और सनातन का प्रचार करो। उन्होंने कहा कि तनाव में वही व्यक्ति रहता है जो अध्यात्म में नहीं रहता। विज्ञान ने समाज और देश को बहुत कुछ दिया है लेकिन इससे हम भगवान की उपस्थिति को नहीं नकार सकते। दूसरों का हित करना ही धर्म है और यही सनातन सिखाता है।
कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जिसने धर्म का पथ छोड़ दिया वही अशांत है। केवल तिलक लगाने और मंदिर जाने से ही कोई धार्मिक नहीं हो जाता, ये सिर्फ धर्म के चिह्न हैं। असली धार्मिकता ग्रंथों तथा पुराणों को अपने जीवन में उतारने से है। हम भगवान राम की कथा सुनते तो हैं परंतु उनके जैसा नहीं बनना नहीं चाहते। आज लोग अपने विकास में समय न लगाकर दूसरों को गिराने में व्यर्थ समय और शक्ति जाया कर रहे हैं। मनुष्य अपने आप को बचाने में, उठाने में समय का सदुपयोग कर ले तो यह धार्मिकता कहलाएगा।
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों में सहनशीलता का अभाव है। बेटियां घर की नौकरानी नहीं होती और पति का यह दायित्व होता है कि घर और घर से बाहर बाहर पत्नी का अपमान नहीं होना चाहिए। परिवार को भी यह बात समझनी चाहिए कि आप बेटी लाए हो नौकरानी नहीं।
माता सीता ने कभी अपनी सास को पलटकर या गलत जवाब नहीं दिया और न ही भगवान राम ने कभी माता सीता का कभी अपमान होने दिया। घरों में रामायण रहेगी तो निश्चित ही परिवार मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि प्रेमिका की खातिर और माता-पिता को छोड़ देना इंसानियत नहीं कहलाता।
