नई दिल्ली : नवनिर्मित दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को सिर्फ तेज रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक के बेहतर वितरण यानि रिडिस्ट्रिब्यूशन के उद्देश्य से भी डिजाइन किया गया है। इसके प्रारंभ हो जाने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड की ओर जाने वाला भारी ट्रैफिक अब पारंपरिक मार्गों से हटकर इस नए एक्सप्रेसवे पर शिफ्ट हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के शुरू हो जाने से कई शहरों और जिलों को जाम से राहत मिल सकेगी।
वर्तमान समय में अभी तक दिल्ली से देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाला अधिकतर ट्रैफिक एनएच-58 के जरिए यानि पुराने दिल्ली–मेरठ–मुजफ्फरनगर रूट से होकर गुजरता था। इस वजह से गाजियाबाद, मोदीनगर, मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में ट्रैफिक का भारी दबाव बना रहता था। खासकर वीकेंड और छुट्टियों के दौरान इन इलाकों में लंबा जाम लगना आम बात थी।
नए एक्सप्रेसवे के शुरू हो जाने के बाद बड़े पैमाने पर यह ट्रैफिक डायवर्ट हो जाएगा। एक्सप्रेसवे दिल्ली को सीधे बागपत, शामली और सहारनपुर के रास्ते देहरादून से जोड़ता है, जिससे पारंपरिक रूट पर वाहनों की संख्या कम हो जाएगी। इसका लाभ गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहरों को मिलेगा, जहां से प्रत्येक दिन लाखों की संख्या में वाहन गुजरते हैं।
नए एक्सप्रेसवे के इस्तेमाल से दिल्ली के अंदर भी ट्रैफिक का दबाव कम हो जाएगा। खासतौर पर आईएसबीटी, आनंद विहार और पूर्वी दिल्ली के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर भारी वाहनों की आवाजाही कम हो जाएगी। इससे शहर के भीतर यात्रा समय घट जाएगा और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना है।
इस परियोजना का सबसे बड़ा गेमचेंजर पहलू रीजनल डायवर्जन है। पंजाब और हरियाणा से देहरादून जाने वाले वाहन अब ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर आएंगे वहां से सीधे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएंगे। अब इन वाहनों को दिल्ली के अंदर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। शुरुआत में इस एक्सप्रेसवे पर 30 हजार पैसेंजर कार यूनिट ट्रैफिक आने का अनुमान है, जो समय के साथ और बढ़ जाएगा।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की नींव पड़ने की कहानी भी कम रोचक नहीं है। मार्च 2018 में दिल्ली-सहारनपुर हाइवे को चौड़ा करने की एक सामान्य सी चर्चा में किसी ने अनुमान भी नहीं लगाया था कि यहीं से यह एक्सप्रेसवे जन्म लेगा। जब यह तथ्य सामने आया कि मार्ग चौड़ीकरण करने पर दिल्ली से सहारनपुर तक हजारों घरों को तोड़ना पड़ सकता है तो ऐसे में फैसला बदल लिया गया और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की नींव पड़ी।
बता दें कि दिल्ली से देहरादून तक पहुंचने वाला यह एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना के तहत वर्ष 2020 में स्वीकृत किया गया था। यह गाजियाबाद, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जिलों को जोड़ते हुए देहरादून तक जाता है।
देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अब नए संगम में जुड़ गई है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे जनता को समर्पित कर देंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार दोपहर दो बजे के पश्चात यह जनता के आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि दोपहिया और तीन पहिया वाहनों को इस एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति नहीं होगी। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सफर की रफ्तार नहीं बढ़ाएगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर को जाम से राहत दिलाने के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक रफ्तार का भी नया मार्ग प्रदान करेगा।
