उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक संगठनों ने वेतन वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की है। उद्यमियों ने इसे आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार पर दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने सुरक्षा, राहत पैकेज और लागत कम करने के उपायों की मांग की, साथ ही पलायन की चेतावनी भी दे डाली।
औद्योगिक इकाइयों पर बढ़ते आर्थिक दबाव और पिछले दिनों श्रमिकों द्वारा नोएडा व ग्रेटर नोएडा में किए गए प्रदर्शनों के बीच वेतन वृद्धि के प्रभाव को लेकर विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की। प्रेस क्लब स्वर्ण नगरी में आयोजित इस वार्ता में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, इंडियन एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन, लघु उद्योग भारती और इकोटेक-12 एसोसिएशन के पदाधिकारी सम्मिलित हुए। सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उद्योगों पर आर्थिक बोझ तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उत्पादन, निवेश और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ने लगा है।
उद्यमियों ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन ने दबाव में आकर श्रमिकों की वेतन वृद्धि का निर्णय लिया, जिसका सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मजदूर संगठनों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से उद्यमियों को संदेश और धमकियां भेजकर 20 हजार रुपए वेतन करने की अनुचित मांग की जा रही है, जिससे उद्योगों में असुरक्षा और तनाव का माहौल बन रहा है।
लघु उद्योग भारती के प्रेसिडेंट ने कहा कि किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले उद्योग संगठनों को विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दबाव डालकर फैसले मनवाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। जब कई जगहों पर उपद्रव की स्थिति बनी तो पुलिस और प्रशासन ने भी उस समय कोई ठोस व्यवस्था नहीं की थी।
उन्होंने बताया कि हालिया घटनाओं में तकरीबन 100 कंपनियों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से एक कंपनी को करीब 80 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। उत्पादन बाधित होने से कई ऑर्डर समय पर पूरे नहीं किए जा सके, जिससे उद्योगों की साख पर भी विपरीत प्रभाव पड़ा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नुकसान की भरपाई नहीं की गई तो उद्योग संगठन धरना-प्रदर्शन करने के लिए विवश हो जाएंगे। आयोजित प्रेस वार्ता में उद्यमियों ने अपनी और अपने प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की हिंसक घटना या दबाव की स्थिति न बन पाए। उनका मानना है कि बिना सुरक्षा के उद्योग चलाना संभव नहीं है और इससे निवेशकों का भरोसा भी डगमगाता है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों का बुरा असर पहले से ही उद्योगों पर पड़ रहा है। उन्होंने टैरिफ वार और अंतरराष्ट्रीय तनाव, विशेष रूप से ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि इन कारणों से कच्चे माल की कीमतों और निर्यात पर असर पड़ा है। ऐसे में अचानक वेतन वृद्धि का अतिरिक्त बोझ उद्योगों के लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर रहा है।
यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो कई उद्योग इकाइयां यहां से अपना कारोबार समेटने पर विचार कर सकती हैं। इससे न केवल स्थानीय रोजगार प्रभावित होगा, बल्कि प्रदेश में निवेश का माहौल भी बिगड़ जाने की संभावना है। उद्यमियों ने सरकार पर कालाबाजारी रोकने में विफल रहने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कच्चे माल और अन्य संसाधनों की कीमतों में अनियंत्रित बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन उस पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
उद्यमियों के मुताबिक उद्योगों पर वेतन वृद्धि का दबाव डाल दिया गया है, जिससे संतुलन बिगड़ गया है। हालिया घटनाओं से संभावित निवेशक भी भयभीत हो रहे हैं, जिससे भविष्य में नए निवेश पर बुरा असर पड़ने की स्थिति बन सकती है। उद्यमियों ने सरकार से मांग की कि वह इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उद्योगों के लिए प्रभावी राहत पैकेज या विशेष योजना लागू करे।
उद्यमियों ने सुझाव दिया कि वेतन वृद्धि से बढ़े आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सरकार पीएफ या अन्य योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को आंशिक राहत प्रदान कर सकती है। इसके अतिरिक्त टैक्स, बिजली दरों और अन्य शुल्कों में भी रियायत दी जाए, ताकि उद्योगों को संभलने का मौका मिल सके।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो उद्योगों का पलायन प्रारंभ हो सकता है, जिससे प्रदेश की औद्योगिक छवि और रोजगार के अवसरों पर गंभीर असर पड़ने लगेगा। उन्होंने सरकार और प्रशासन से सार्थक संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की अपील की, ताकि उद्योग और श्रमिक दोनों के हितों का संतुलन बना रह सके।
