उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुए श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन के बाद प्रदेश सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। बता दें कि न्यूनतम वेतन सहित अपनी कई मांगों को लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के श्रमिक सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसका संज्ञान लेते हुए सरकार की मंशा के अनुरूप यूपी के औद्योगिक विकास आयुक्त व समिति के अध्यक्ष द्वारा सोमवार को श्रमिकों और उद्यमियों के साथ सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से वार्ता की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरकार से वेतन बढ़ाने सहित कई मूलभूत सुविधाओं की सिफारिश की गई। 

इस पर प्रदेश सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में काम कर रहे श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में अंतरित वृद्धि की है। अब न्यूनतम वेतन 13690 से लेकर 16868 रुपए के मध्य तय किया गया है। उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद सरकार ने इसपर मुहर लगाकर नई दरों को एक अप्रैल से लागू कर दिया है। समिति के सदस्यों के मुताबिक यह अंतरिम राहत है। केंद्र सरकार की नई श्रम संहिता के तहत राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें और वृद्धि की जाएगी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद सरकार से वेतन बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। फिलहाल इसमें अंतरिम वृद्धि की गई है और तकरीबन 20 – 21 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। हालांकि श्रमिकों ने 40 प्रतिशत वृद्धि की मांग रखी थी, लेकिन उद्यमियों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी न्यूनतम वेतन तय करने की प्रक्रिया चल रही है और श्रमिकों के मूल वेतन में और अधिक वृद्धि होने की पूरी संभावना है। फिलहाल न्यूनतम वेतन 13690 से लेकर 16868 रुपए के बीच तक किया गया है जोकि एक अप्रैल से लागू होगा।

नोएडा की जिलाधिकारी के मुताबिक श्रमिकों की वेतन बढ़ाने की मांग को मान लिया गया है। जो श्रमिक ओवर टाइम काम कर रहे है, उन्हें दोगुना मेहनताना दिया जाएगा और सभी को साप्ताहिक अवकाश प्रदान किया जाएगा। यदि कोई साप्ताहिक अवकाश में काम कर रहा है तो उसको भी दोगुना भुगतान करना होगा। सभी श्रमिकों को माह की 10 तारीख से पूर्व एकमुश्त वेतन दे दिया जाएगा और सभी श्रमिकों को वेतन पर्ची भी दी जाएगी।

वार्षिक बोनस नवंबर माह से पहले दिया जाएगा और साथ ही प्रत्येक कंपनी में यौन उत्पीड़न समिति गठित की जाएगी। गठित की गई समिति की अध्यक्ष महिला ही होंगी और प्रत्येक कंपनी को शिकायत पेटिका भी रखनी होगी। इसके अतिरिक्त भी अगर किसी श्रमिक की कोई शिकायत है तो वो कंट्रोल रूम पर सूचित कर सकता हैं।

इसके अलावा श्रमिकों के रहने के लिए, स्वास्थ्य, पीने के पानी, शौचालय आदि उपलब्ध कराने में भी सहयोग किया जाएगा। सभी श्रमिकों से जिले की शांति व्यवस्था को बनाए रखने की अपील की गई है।

उच्च स्तरीय समिति ने श्रमिकों और उद्यमियों के साथ वार्ता की जो मंगलवार को भी जारी रही। श्रमिकों का कहना है कि महंगाई बढ़ गई है और उनके वेतन में भी वृद्धि होनी चाहिए। जबकि उद्यमियों का कहना है कि युद्ध के कारण उनके काम की स्थिति  चिंताजनक बनी हुई है। कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ी हुई है और ऐसी स्थिति में उनका भी ख्याल रखा जाना चाहिए। अगर उनका कामकाज प्रभावित होगा तो इसका प्रभाव सभी पर पड़ना लाजमी है।

समिति के अनुसार, वार्ता में श्रमिकों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वो किसी भी प्रकार की हिंसा के पक्ष में नहीं हैं और सारा उपद्रव बाहर से आए शरारती तत्वों ने किया है। यहां उनकी रोजी-रोटी है और वह कभी नहीं चाहेंगे कि इसे किसी तरह का नुकसान पहुंचे। प्रशासन ने कुछ बाहरी तत्वों को चिन्हित किया गया है जिनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तकनीकी निगरानी, खुफिया तंत्र और स्थानीय स्तर पर सूचना एकत्रित की जा रही है।

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