महाराष्ट्र : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से तकरीबन सात सांसद सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने पर विचार – विमर्श कर रहे हैं। इन अटकलों के बीच शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दिल्ली पहुंचने की खबरों से मुद्दा और गरमा गया है।
दूसरी ओर पार्टी नेता संजय राउत द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि सांसदों को पाला बदलने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की जा रही है।
तृणमूल कांग्रेस में हुई बगावत के उपरांत अब शिवसेना (यूबीटी) भी एक बड़े संकट से जूझ रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसद सत्ताधारी शिवसेना में सम्मिलित होने को उत्सुक हैं और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में डेरा जमाए हैं। इस बीच उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जो जहां जाना चाहते हैं, खुशी से जाएं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने लोकसभा सदस्यों के टूटने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पता चला है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे मंगलवार देर रात राजधानी दिल्ली के लिए रवाना होने का कार्यक्रम तय कर रहे थे।
वर्तमान समय में पार्टी के कई सांसदों के फोन अचानक बंद बताए जा रहे हैं और कई सांसद संपर्क क्षेत्र से बाहर हो गए हैं। खबरों के अनुसार, पार्टी के नौ में से छह सांसद या तो दिल्ली पहुंच चुके हैं या उनके बुधवार तक पहुंचने की संभावना है। अपनी पार्टी में टूट की आशंका के मद्देनजर स्वयं उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कमान संभाल ली है।
उद्धव ठाकरे नाराज और संपर्क से बाहर चल रहे सांसदों से तालमेल बिठाने और उन्हें मना लेने के प्रयासों में जुटे हैं। उद्धव के करीबी लोकसभा सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई के बुधवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। पार्टी ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में अपने संसदीय दल की एक आपात बैठक बुलाई है।
इस गहमागहमी के बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मंगलवार देर रात दावा किया कि महाराष्ट्र से सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रूपए की एडवांस धनराशि दी जा रही है। उनका यह दावा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सदस्यों के पाला बदलने की अटकलों को और अधिक मजबूती प्रदान कर रहा रहा है।
देर रात एक्स पर एक पोस्ट में राउत ने कहा कि “अपना सपना मनी… मनी। ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज 15 करोड़ रुपए का एडवांस दिया जाएगा। यह चौंकाने वाला और घृणित है।”
वहीं, सूत्रों ने से प्राप्त जानकारी के मुताबिक शिंदे के मंगलवार देर रात तक दिल्ली पहुंचने की उम्मीद थी। शिंदे खेमे के एक नेता ने भी छह से सात सांसदों के पाला बदलने की संभावना व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम पार्टी में आदित्य ठाकरे की भूमिका से जुड़ा है।
वहीं, देर रात शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत का लोकसभा अध्यक्ष को लिखा गया एक पत्र भी सामने आया है। इसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया गया है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी कथित गुट या अलग हुए समूह को कोई अलग मान्यता, दर्जा, विशेषाधिकार या सुविधा न दी जाए। शिवसेना (यूबीटी) ने यह निवेदन भी किया गया है कि यदि इस तरह का कोई अनुरोध लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष आता है, तो उस पर कोई निर्णय लेने से पूर्व पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाए।
पत्र में आगे कहा गया है कि पार्टी कानून के तहत उपलब्ध अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखती है। इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के प्रावधानों का सहारा लेने और संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत किसी भी आचरण के संबंध में आवश्यक कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार भी सम्मिलित है।
विदित हो कि बीते रविवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई एक बैठक में पार्टी के नौ सांसदों में से केवल चार के उपस्थित होने के बाद संभावित दलबदल की अटकलों को हवा मिली थी। वहीं राउत का दावा था कि शेष पांच सांसदों ने वर्चुअल माध्यम से या फोन पर बैठक में हिस्सा लिया था। राउत ने मंगलवार को कहा कि गलत तस्वीर पेश की जा रही है और सभी सांसद तथा पार्टी उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।
मंगलवार सुबह से ही उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। इस पर सत्तारूढ़ शिवसेना के नेता प्रताप सरनाईक ने असंतुष्टों का स्वागत करने और उन्हें प्राथमिकता देने का संकेत देकर इन अटकलों को और तेज कर दिया था।
यह विषय तब और चर्चा में आ गया जब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और उद्धव ठाकरे के करीबी माने जाने वाले संजय राउत दिल्ली पहुंच गए। ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं, ताकि पार्टी के नौ सांसदों द्वारा एक अलग समूह बनाने के किसी भी प्रयास पर लगाम कसी जा सके।
