हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश सरकार ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना में व्यापक बदलाव कर दिया है। इस बदलाव के तहत अब 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों को 1500 रुपये प्रतिमाह का लाभ नहीं मिल सकेगा।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी बहुचर्चित इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना में बड़ा फेरबदल करते हुए इसके दायरे को सीमित कर दिया है। संशोधित अधिसूचना के मुताबिक अब 18 से 20 वर्ष आयु वर्ग की युवतियां इस योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि के लिए पात्र नहीं होंगी। योजना का लाभ अब सिर्फ 21 से 59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को दिया जाएगा।

साथ ही सरकार द्वारा योजना में परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपए से कम होने की अनिवार्य शर्त भी जोड़ दी गई है। इससे दो लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों की महिलाओं को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल सकेगा।

बता दें कि इससे पहले वर्ष 2024 में सरकार ने योजना में एक बदलाव और किया था, जिसके तहत एक परिवार से केवल एक ही महिला को 1500 रुपये की सम्मान राशि देने का निर्णय लिया गया था।

प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान सभी पात्र महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने की गारंटी दी थी। इस। योजना की शुरुआत में आयु का दायरा 18 से 59 वर्ष निर्धारित किया गया था। परंतु अब सरकार ने 18 से 20 वर्ष आयु की युवतियों को इस योजना की पात्रता से बाहर कर दिया है।

सरकार ने लाभार्थियों का दायरा सीमित करते हुए पात्रता की नई शर्तें लागू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक बढ़ते वित्तीय बोझ और वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

योजना के तहत अब महिलाओं को आवेदन पत्र के साथ परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम होने का प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा योजना में बीपीएल परिवारों की महिलाओं को भी प्राथमिकता के साथ शामिल किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

नए आवेदन पत्र में आय और बीपीएल स्थिति से संबंधित अलग कॉलम जोड़े जाएंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मुताबिक सरकार की ओर से दिशा-निर्देश जारी होते ही नए आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके उपरांत पात्र महिलाओं का सत्यापन कर उन्हें योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए हिमाचल प्रदेश की स्थायी निवासी महिला होना अनिवार्य है, जिसकी आयु 21 से 59 वर्ष के मध्य हो। परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से कम होनी चाहिए। योजना के लिए बौद्ध मठों में स्थायी रूप से रहने वाली बौद्ध भिक्षुणियां भी पात्र होंगी। परिवार का कोई सदस्य नियमित सरकारी कर्मचारी या पेंशन भोगी नहीं होना चाहिए।

दैनिक वेतनभोगी, अनुबंध, आउटसोर्स कर्मचारी, अंशकालिक कर्मचारी, सेवारत व भूतपूर्व सैनिक, सैनिक विधवाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, आशा वर्कर, मिड-डे मील वर्कर, मल्टी टास्क वर्कर तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थी इस योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

शहरी निकायों तथा सरकारी बोर्ड, पंचायती राज संस्थाओं, निगम, परिषद और एजेंसियों में कार्यरत या पेंशनभोगी व्यक्तियों के परिवारों को भी इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।

इस योजना की पात्रता के लिए हिमाचल प्रदेश का बोनाफाइड या स्थायी निवास प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, परिवार की वार्षिक आय का प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण, आधार कार्ड, शहरी क्षेत्र के लिए राशन कार्ड, ग्रामीण क्षेत्र के लिए परिवार रजिस्टर की प्रति, बौद्ध भिक्षुणियों के लिए मुख्य चोमो द्वारा जारी प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लगाना आवश्यक होगा। योजना का आवेदन पत्र जिला कल्याण अधिकारी अथवा तहसील कल्याण अधिकारी कार्यालय के माध्यम से प्राप्त किया जा सकेगा।

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