उत्तराखंड : उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से एक संवेदनशील राज्य है, और यहां भूस्खलन की घटनाएं एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। मानसून में होने वाली बारिश के साथ ही पहाड़ों की भौगोलिक संरचना, कमजोर चट्टानें, नदियों का कटाव और मानवीय गतिविधियां इस खतरे में और अधिक इजाफा कर रही हैं।
उत्तरकाशी जिले में भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों को लेकर एक अध्ययन किया गया है, जिसमें कई तरह के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
इस रिपोर्ट की सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि उत्तरकाशी जिले का 9 फीसदी हिस्सा ऐसा है, जहां लैंडस्लाइड की तकरीबन 73प्रतिशत घटनाएं घटित हुई हैं। अध्ययन में यमुना और भागीरथी नदी घाटियों के आसपास के क्षेत्रों के साथ यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे के कई हिस्सों को भी भूस्खलन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बताया गया है।
शोधकर्ताओं ने इसके पीछे की वजह बरसात, पहाड़ों की ढलान और ऊंचाई, चट्टानों की बनावट, नदी के कटाव और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया है।
अध्ययन में बताया गया है कि उत्तरकाशी जिला उत्तराखंड के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और पश्चिमी हिमालय का महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिला है। रिपोर्ट के मुताबिक जिले की भौगोलिक स्थिति और भूगर्भीय संरचना की वजह से यह प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है।
उत्तरकाशी जिले में हिमालय की तीन प्रमुख भूगर्भीय संरचनाएं मौजूद हैं। इनमें लेसर हिमालय सीक्वेंस, हायर हिमालयन क्रिस्टलाइन और टेथियन हिमालयन सीक्वेंस सम्मिलित हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इन क्षेत्रों में भूगर्भीय हलचल, चट्टानों का टूटना, दरारें और कमजोर संरचनाएं पहाड़ों की स्थिरता को प्रभावित करती हैं।
इसके अलावा उत्तरकाशी का एक बड़ा हिस्सा भूकंप के लिहाज से भी अति संवेदनशील है। भूकंप अथवा तेज बारिश पड़ने से कमजोर पहाड़ी ढलानों के अपने स्थान से खिसकने की आशंका बढ़ सकती है। शोधकर्ताओं द्वारा उत्तरकाशी जिले में भूस्खलन की स्थिति को जानने और समझने के लिए सैटेलाइट इमेजरी, गूगल अर्थ इंजन, गूगल अर्थ प्रो, हाई रेजुलेशन इमेज और स्थानीय सर्वे के आधार पर एक डेटाबेस तैयार किया है।
अध्ययन के दौरान कुल 1,900 से अधिक ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां पहले भूस्खलन की घटनाएं घट चुकी थीं। इन क्षेत्रों को चिह्नित करने के लिए जमीन की सतह पर हो रहे बदलाव, वनस्पति में कमी, पहाड़ी की बनावट और प्रभावित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति जैसे इंडिकेटर्स का इस्तेमाल किया गया।